Mumbai में गोल्ड लोन कंपनी से 78.1 लाख की ठगी, एक घंटे में हुए 18 फर्जी ट्रांजैक्शन
Maharashtra: मुंबई के परेल इलाके में एक गोल्ड लोन कंपनी के साथ बड़ी साइबर धोखाधड़ी हुई है। हैकर्स ने कंपनी के लोन मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का एक्सेस हासिल कर करीब 78.1 लाख रुपये उड़ा लिए। हैरानी की बात यह है कि ये सभी 18 फर्ज
Maharashtra: मुंबई के परेल इलाके में एक गोल्ड लोन कंपनी के साथ बड़ी साइबर धोखाधड़ी हुई है। हैकर्स ने कंपनी के लोन मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का एक्सेस हासिल कर करीब 78.1 लाख रुपये उड़ा लिए। हैरानी की बात यह है कि ये सभी 18 फर्जी ट्रांजैक्शन एक घंटे से भी कम समय में किए गए।
यह पूरा मामला 13 जुलाई 2026 का है। हैकर्स ने सुबह 10:49 से दोपहर 12:18 के बीच कंपनी के करंट अकाउंट से पैसे ट्रांसफर किए। कंपनी को इस चोरी का पता 14 जुलाई को तब चला जब वे अपने खातों का मिलान कर रहे थे। उन्हें कुछ ऐसे ट्रांजैक्शन दिखे जो किसी भी मंजूर लोन या ग्राहक की रिक्वेस्ट से मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद 16 जुलाई को कंपनी ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद 17 जुलाई को मुंबई की सेंट्रल साइबर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जांच में पता चला है कि हैकर्स ने Omnifin (Loan Management System) और Paysprint Private Limited के जरिए जुड़े एक थर्ड पार्टी API सिस्टम में सेंध लगाई थी। इस सिस्टम की वजह से बैंक अकाउंट से पैसे अपने आप ट्रांसफर हो रहे थे और इसके लिए किसी कंपनी की मंजूरी या OTP की जरूरत नहीं थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर अपराधियों ने तेजी से पैसे निकाले।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल ठगी की राशि | 78.1 लाख रुपये |
| कुल ट्रांजैक्शन | 18 |
| समय सीमा | एक घंटे से कम (10:49 AM – 12:18 AM) |
| सॉफ्टवेयर/सिस्टम | Omnifin LMS और Paysprint API |
| प्रभावित क्षेत्र | परेल, मुंबई |
| पैसे ट्रांसफर हुए राज्य | जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र और अन्य |
सेंट्रल साइबर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि जिन बैंक खातों में पैसा गया है, उनकी जानकारी मांगी गई है और उन खातों को फ्रीज करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस धोखाधड़ी में बैंक या कंपनी के किसी अंदरूनी कर्मचारी का हाथ था। कंपनी के डायरेक्टर G.M. Amit ने FIR में साफ किया है कि ये सभी ट्रांजैक्शन पूरी तरह अवैध थे क्योंकि इनके पीछे कोई असली लोन केस नहीं था।