Maharashtra: मुंबई के गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) प्रोजेक्ट में अब काम की रफ्तार बढ़ने वाली है। इस प्रोजेक्ट के लिए दो विशाल टनल बोरिंग मशीनें (TBM) लाई जा रही हैं, जिन्हें शहर की सबसे पुरानी झीलों ‘तुलसी’
Maharashtra: मुंबई के गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) प्रोजेक्ट में अब काम की रफ्तार बढ़ने वाली है। इस प्रोजेक्ट के लिए दो विशाल टनल बोरिंग मशीनें (TBM) लाई जा रही हैं, जिन्हें शहर की सबसे पुरानी झीलों ‘तुलसी’ और ‘विहार’ के नाम पर नाम दिया जाएगा। ये मशीनें संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे से रास्ता बनाएंगी, जिससे शहर के ट्रैफिक में बड़ी राहत मिलेगी।
इन मशीनों का नाम तुलसी और विहार क्यों रखा गया है?
मुंबई की प्यास बुझाने वाली तुलसी और विहार झीलें 19वीं सदी से शहर को पानी दे रही हैं। टनल बोरिंग मशीनें इन्हीं झीलों के बीच से गुजरेंगी। उत्तरी हिस्से वाली मशीन का नाम ‘तुलसी’ और दक्षिणी हिस्से वाली का नाम ‘विहार’ रखने का प्रस्ताव है। बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रोजेक्ट की खासियत और काम की प्रगति क्या है?
यह प्रोजेक्ट बीएमसी की देखरेख में बन रहा है और इसका काम J.Kumar–NCC प्राइवेट लिमिटेड कर रही है। फिल्म सिटी के लॉन्च शाफ्ट साइट पर मशीनों के पुर्जों को जोड़ा जा रहा है। पहली मशीन का काम जून के दूसरे हफ्ते तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद इसका टेस्ट किया जाएगा।
- कुल दूरी: संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे 6.65 किमी की खुदाई होगी।
- मशीन का आकार: ये 14.42 मीटर व्यास वाली भारत की सबसे बड़ी टनल मशीनें होंगी।
- वजन: एक मशीन का वजन करीब 2,175 टन है।
- लेन की संख्या: हर टनल में ट्रैफिक के लिए तीन लेन होंगी।
काम कब तक पूरा होगा और क्या होगा असर?
IIT बॉम्बे के अर्थ साइंस विभाग की रिपोर्ट ने कन्फर्म किया है कि इन सुरंगों से पानी के जलाशयों को कोई नुकसान नहीं होगा। टनल बनाने का काम अक्टूबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरे प्रोजेक्ट को दिसंबर 2028 तक खत्म करने की योजना है, जिससे गोरेगांव और मुलुंड के बीच सफर का समय काफी कम हो जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
GMLR टनल प्रोजेक्ट का काम कब तक पूरा होगा?
टनलिंग का काम अक्टूबर 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि पूरे प्रोजेक्ट को दिसंबर 2028 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या इन सुरंगों से मुंबई की झीलों को खतरा है?
नहीं, IIT बॉम्बे के अर्थ साइंस विभाग की स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, इन टनल से तुलसी और विहार जलाशयों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।