Maharashtra: मुंबई के घाटकोपर (पश्चिम) में एक ढही हुई इमारत के 52 किरायेदारों को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपने पुनर्विकास (redevelopment) मामले में
Maharashtra: मुंबई के घाटकोपर (पश्चिम) में एक ढही हुई इमारत के 52 किरायेदारों को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपने पुनर्विकास (redevelopment) मामले में एक नए बिल्डर को पार्टी बनाने की मांग की थी। इतना ही नहीं, कोर्ट ने इस आवेदन को कानून का दुरुपयोग मानते हुए किरायेदारों पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
कोर्ट ने क्यों लगाया 5 लाख का जुर्माना?
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने पाया कि यह आवेदन असल में प्रस्तावित नए बिल्डर BS Lifespace द्वारा फाइनेंस और प्रेरित था। कोर्ट ने कहा कि यह मकान मालिकों और पुराने बिल्डर के खिलाफ एक दबाव बनाने की रणनीति थी ताकि एक ऐसे अधिकार को कानूनी रूप दिया जा सके जो वास्तव में लागू नहीं हो सकता। कोर्ट ने इसे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और जबरन वसूली का एक तरीका बताया।
किरायेदारों की मांग और कोर्ट का फैसला
किरायेदारों ने तर्क दिया था कि काम में बहुत देरी हो रही है और उन्हें डर है कि मकान मालिक उन्हें स्थाई वैकल्पिक आवास (PAA) नहीं देंगे। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि नए बिल्डर का मकान मालिकों के साथ कोई कानूनी अनुबंध (privity of contract) नहीं है। इसलिए उन्हें इस केस में शामिल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से मामला और ज्यादा उलझ जाएगा।
अब आगे क्या होगा और जुर्माना कहां जाएगा?
कोर्ट ने आदेश दिया है कि 5 लाख रुपये का यह जुर्माना दो हफ्ते के भीतर बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा के एडवोकेट एकेडमी एंड रिसर्च सेंटर को जमा करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई और अनुपालन रिपोर्ट (compliance reporting) 15 जून 2026 को तय की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह मामला किस इमारत से जुड़ा है?
यह मामला घाटकोपर पश्चिम के एलबीएस मार्ग पर स्थित कमला भवन (Kamla Bhuvan) नाम की इमारत का है, जिसे बीएमसी ने अप्रैल 2018 में गिरा दिया था।
कोर्ट ने नए बिल्डर को शामिल करने से क्यों मना किया?
कोर्ट ने कहा कि नए बिल्डर BS Lifespace का मकान मालिकों के साथ कोई कानूनी अनुबंध नहीं है, इसलिए उन्हें केस में पार्टी बनाना गलत होगा और इससे मामला और जटिल हो जाएगा।