Maharashtra: मुंबई के घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड पर स्थित 11 एकड़ सरकारी जमीन अब सेंट्रल जेल अथॉरिटी को सौंप दी गई है। शुक्रवार को राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मुंबई उपनगर के संरक्षक मंत्री मंगल प्रभात लोढ
Maharashtra: मुंबई के घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड पर स्थित 11 एकड़ सरकारी जमीन अब सेंट्रल जेल अथॉरिटी को सौंप दी गई है। शुक्रवार को राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मुंबई उपनगर के संरक्षक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की मौजूदगी में यह हैंडओवर पूरा हुआ। इस जमीन पर अब एक नया जेल कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा जिससे शहर की मौजूदा जेलों में भीड़ कम होगी।
जमीन खाली कराने के लिए क्या कदम उठाए गए?
इस जमीन को जेल के लिए उपलब्ध कराने से पहले अप्रैल 2026 में एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया था। 8 अप्रैल को एक ही दिन में करीब 1,200 झोपड़ियों को हटाया गया। मुंबई उपनगर कलेक्टर सौरभ कटियार ने बताया कि 2011 के बाद बनी बस्तियों को हटाने के लिए SRA ने सैटेलाइट इमेजरी और NETRAM तकनीक का इस्तेमाल किया। यह पहली बार था जब इस तकनीक के जरिए अतिक्रमण हटाया गया।
नई जेल से क्या होगा फायदा और इसकी योजना क्या है?
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के मुताबिक, इस नए कॉम्प्लेक्स से मुंबई की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर होगी। वर्तमान में आर्थर रोड जेल जैसे केंद्रों पर क्षमता से ज्यादा कैदी हैं, जहां 804 की जगह 1,814 कैदी रह रहे हैं। योजना के अनुसार, मानखुर्द के इस इलाके में 5 एकड़ जमीन पर 25 मंजिला जेल बनाने का प्रस्ताव था, जिसमें 10,000 कैदियों को रखा जा सके।
प्रशासन ने आगे के लिए क्या चेतावनी दी है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गृह विभाग के निर्देशों के बाद यह जमीन उपलब्ध कराई गई है। जमीन खाली होते ही PWD ने इसकी सुरक्षा के लिए कंपाउंड वॉल बनाना शुरू कर दिया। कलेक्टर सौरभ कटियार ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा करने वालों के खिलाफ तकनीक की मदद से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नई जेल के लिए कितनी जमीन ली गई है और कहां स्थित है?
मुंबई के कुर्ला तालुका के मौजे मानखुर्द में घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड के किनारे 11 एकड़ राजस्व जमीन ली गई है।
जमीन खाली कराने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ?
SRA ने साल 2000 की सैटेलाइट इमेजरी और NETRAM (Network for Encroachment Tracking and Reporting for Mumbai) तकनीक का उपयोग कर 2011 के बाद बनी झोपड़ियों की पहचान की।