Mumbai में भारी बारिश से हाहाकार, स्कूल-कॉलेज बंद और ट्रेनें ठप; जानिए क्यों हर साल डूबती है मायानगरी

Maharashtra: मुंबई में मानसून की भारी बारिश ने एक बार फिर आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर की सड़कों पर पानी भर गया है, ट्रेनें देरी से चल रही हैं और ट्रैफिक जाम की वजह से लोग घंटों सड़कों पर फंसे रहे। म

Maharashtra: मुंबई में मानसून की भारी बारिश ने एक बार फिर आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर की सड़कों पर पानी भर गया है, ट्रेनें देरी से चल रही हैं और ट्रैफिक जाम की वजह से लोग घंटों सड़कों पर फंसे रहे। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने कई बड़े कदम उठाए हैं ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

IMD ने मुंबई और आसपास के इलाकों जैसे ठाणे, पालघर और रायगढ़ के लिए रेड अलर्ट जारी किया था, जिसे बाद में ऑरेंज अलर्ट में बदला गया। भारी बारिश के कारण 7 जुलाई 2026 को सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल और कॉलेज बंद रखे गए। मुंबई यूनिवर्सिटी ने भी इस दिन होने वाली सभी परीक्षाएं टाल दीं। परिवहन पर इसका बुरा असर पड़ा, खासकर मुंबई-पुणे रेल कॉरिडोर पर भूस्खलन की वजह से ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी कुछ फ्लाइट्स को डायवर्ट करना पड़ा।

इस आपदा के दौरान कई दुखद घटनाएं भी सामने आईं। मानखुर्द इलाके में एक इमारत गिरने से पांच बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई। वहीं पिछले तीन-चार दिनों में मुंबई, पालघर और रायगढ़ में बारिश से जुड़ी घटनाओं में कुल 13 लोगों की जान गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोगों से गैर जरूरी यात्रा न करने की अपील की है और राज्य मशीनरी को हाई अलर्ट पर रखा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई में हर साल होने वाली इस बाढ़ के पीछे केवल बारिश नहीं, बल्कि कई प्राकृतिक और मानव निर्मित कारण हैं। शहर की भौगोलिक स्थिति नीची है और ड्रेनेज सिस्टम काफी पुराना हो चुका है, जो भारी बारिश का दबाव नहीं झेल पाता। इसके अलावा, तेजी से बढ़ते शहरीकरण की वजह से कंक्रीट का जाल बिछ गया है, जिससे जमीन पानी नहीं सोख पाती। मैंग्रोव और वेटलैंड्स के घटने से प्राकृतिक बफर खत्म हो गया है।

मुंबई में बाढ़ के मुख्य कारण असर और प्रभाव
पुराना ड्रेनेज नेटवर्क और जाम नालियां पानी की निकासी धीमी होना और सड़कों पर जलजमाव
लो-लाइंग ज्योग्राफी और हाई टाइड समुद्र का पानी वापस शहर में आना और पानी का न निकल पाना
मैंग्रोव और वेटलैंड्स में कमी प्राकृतिक रूप से पानी सोखने वाली जगहों का खत्म होना
तेजी से शहरीकरण और कंक्रीट बारिश का पानी जमीन में न जाकर सीधा सड़कों पर आना
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (मेट्रो, ब्रिज) निर्माण कार्यों से स्थानीय ड्रेनेज पैटर्न का बिगड़ना
जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक बारिश कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होना जिससे सिस्टम फेल हो जाना

BMC ने स्थिति को संभालने के लिए शहर में 547 पोर्टेबल पंप लगाए हैं और इनकी निगरानी के लिए IoT सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों को खुले मैनहोल, बिजली के खंभों और खतरनाक पेड़ों से दूर रहने की सलाह दी है। NDRF और SDRF की टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है।