Maharashtra : मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कुर्ला कारशेड में देश की पहली ऐसी नॉन-एसी लोकल ट्रेन पहुंच गई है जिसके दरवाजे मेट्रो की तरह अपने आप बंद औ
Maharashtra : मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कुर्ला कारशेड में देश की पहली ऐसी नॉन-एसी लोकल ट्रेन पहुंच गई है जिसके दरवाजे मेट्रो की तरह अपने आप बंद और खुलेंगे। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार हुई इस 12 कोच वाली ट्रेन का अब रेलवे के विशेषज्ञों द्वारा ट्रायल शुरू किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से यह मुंबई रेल नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
क्यों खास है यह नई लोकल ट्रेन और क्या है इसका मकसद?
इस ट्रेन को खासतौर पर उन हादसों को रोकने के लिए बनाया गया है जहां भीड़ की वजह से लोग चलती ट्रेन से नीचे गिर जाते हैं। जून 2025 में मुम्ब्रा के पास हुई एक दर्दनाक घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने यह कड़ा फैसला लिया था। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले ही घोषणा की थी कि मुंबई की सभी नई लोकल ट्रेनों में ऑटोमैटिक डोर सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम न केवल यात्रियों को सुरक्षित रखेगा बल्कि चलती ट्रेन में चढ़ने और उतरने के जोखिम को भी खत्म कर देगा।
बिना एसी के हवा और वेंटिलेशन के लिए क्या किए गए हैं इंतजाम?
आम यात्रियों को डर रहता है कि नॉन-एसी ट्रेन में दरवाजे बंद होने से घुटन हो सकती है। रेलवे ने इसके समाधान के लिए डिजाइन में कई बड़े बदलाव किए हैं:
- खिड़कियों की चौड़ाई को करीब 900 मिमी से बढ़ाकर 1900 मिमी कर दिया गया है ताकि ज्यादा हवा अंदर आ सके।
- छत पर लगे वेंटिलेशन ब्लोअर्स अब पहले के मुकाबले 6000 की जगह 10,000 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ताजी हवा अंदर भेजेंगे।
- हवा के कुदरती बहाव के लिए दरवाजों में खास तरह की जालीदार (Louvred) स्लिट्स दी गई हैं।
- एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे में जाने के लिए बीच में रास्ता (Vestibule) दिया गया है जिससे भीड़ को बराबर बांटने में मदद मिलेगी।
- सुरक्षा के लिए इसमें फायर डिटेक्शन सिस्टम और हर डिब्बे में इमरजेंसी अलार्म बटन भी लगाए गए हैं।
क्या सफर में लगने वाले समय पर पड़ेगा इसका असर?
रेलवे अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि ऑटोमैटिक दरवाजे होने की वजह से स्टेशनों पर ट्रेन के रुकने का समय यानी हॉल्ट टाइम थोड़ा बढ़ सकता है। हर स्टेशन पर दरवाजों को पूरी तरह खुलने और बंद होने में कुछ अतिरिक्त सेकंड का समय लगेगा। इससे ट्रेनों की समयबद्धता यानी पंक्चुअलिटी पर शुरुआती असर पड़ सकता है। फिलहाल RDSO की टीम इसकी बारीकी से जांच करेगी और ट्रायल सफल होने के बाद ही इसे आम जनता के लिए पटरी पर उतारा जाएगा।