Mumbai में 43 करोड़ का रिडेवलपमेंट घोटाला, रिहैब फ्लैट्स को अवैध रूप से बेचने के आरोप में EOW ने शुरू की जांच

Maharashtra/Mumbai: मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने परेल के चिंचपोकली इलाके में चार इमारतों के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में करीब 42.96 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इस मामले में एक बिल्डर, उसके डा

Maharashtra/Mumbai: मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने परेल के चिंचपोकली इलाके में चार इमारतों के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में करीब 42.96 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इस मामले में एक बिल्डर, उसके डायरेक्टर और कई बैंकों समेत अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) फ्लैट्स को अवैध तरीके से बेचा और उन पर भारी लोन लिया।

यह पूरा मामला श्रीमोतंका टेनेंट्स को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के सचिव प्रदीप सावंत की शिकायत पर शुरू हुआ। शिकायत के मुताबिक, सिद्धिविनायक कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और उसके तीन डायरेक्टर सचिन मधुकर खानोलकर, बिंदिया सचिन खानोलकर और अभिजीत वसंतराव कबीर ने मिलकर यह खेल खेला। आरोपियों ने उन फ्लैट्स को तीसरे पक्ष को बेच दिया जो असल में पुराने किरायेदारों के लिए आरक्षित थे।

जांच में सामने आया है कि 33 रिहैब फ्लैट्स और तीन रिजर्व एरिया के बदले वित्तीय संस्थानों से करीब 37.80 करोड़ रुपये का लोन लिया गया। एक उदाहरण के तौर पर फ्लैट नंबर 704 का जिक्र किया गया, जो अमोघ मालवणकर नाम के किरायेदार के लिए था, लेकिन उसे कई बार बेचा गया और फिर उस पर करीब 80.91 लाख रुपये का लोन लिया गया।

विवरण राशि/जानकारी
कुल अनुमानित धोखाधड़ी 42.96 करोड़ रुपये
बैंकों से लिया गया लोन 37.80 करोड़ रुपये
बकाया ट्रांजिशनल रेंट (2014-17) 2.8 करोड़ रुपये
प्रॉपर्टी टैक्स और BMC बकाया 2.36 करोड़ रुपये
FSI/TDR लाभ करीब 15 करोड़ रुपये
मुख्य आरोपी कंपनी Siddhivinayak Construction Pvt Ltd

बिल्डर पर यह भी आरोप है कि उसने 2014 से 2017 के बीच किरायेदारों को दिया जाने वाला किराया नहीं चुकाया और प्रॉपर्टी टैक्स व पानी के बिलों का भुगतान भी नहीं किया। इसके अलावा छह फ्लैट्स की डबल रजिस्ट्री करने और करीब 15 करोड़ रुपये का TDR लाभ उठाने का आरोप भी लगा है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद यह शिकायत दर्ज कराई गई थी। शुरुआत में यह केस कालाचौकी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था, जिसे बाद में गहन जांच के लिए EOW को ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में सिद्धिविनायक कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर और 21 अन्य लोगों, जिनमें 9 वित्तीय संस्थान और 13 फ्लैट खरीदार शामिल हैं, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र ओनरशिप फ्लैट्स एक्ट (MOFA), 1963 की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।