Maharashtra: मुंबई के डोकाडिया परिवार की मौत के मामले में एक बड़ा अपडेट आया है। शुरुआती शक तरबूज में मिलावट पर था, लेकिन FDA की जांच में इसमें कोई बाहरी रंग या मीठा नहीं मिला है। अब पुलिस और डॉक्टर इस बात की जांच कर रहे
Maharashtra: मुंबई के डोकाडिया परिवार की मौत के मामले में एक बड़ा अपडेट आया है। शुरुआती शक तरबूज में मिलावट पर था, लेकिन FDA की जांच में इसमें कोई बाहरी रंग या मीठा नहीं मिला है। अब पुलिस और डॉक्टर इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह किसी खतरनाक बैक्टीरिया या जहर का असर था।
FDA की रिपोर्ट में क्या निकला और क्या नहीं
FDA ने बताया कि डोकाडिया परिवार के घर से लिए गए खाने के नमूनों में कोई मिलावट नहीं मिली है। तरबूज में कोई सिंथेटिक रंग या आर्टिफिशियल स्वीटनर नहीं पाया गया। हालांकि, FDA ने यह भी साफ किया कि उनके टेस्ट से बैक्टीरिया या अन्य जहरीले तत्वों का पता नहीं चलता, इसलिए उन्हें पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। पानी के सैंपल की रिपोर्ट अभी साफ नहीं है और मांस के नमूने को BMC लैब भेजा गया है।
पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच में क्या मिला
फोरेंसिक जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। मृतकों के दिमाग, दिल और आंतों का रंग असामान्य रूप से हरा पाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम फूड पॉइजनिंग में ऐसा नहीं होता, यह किसी बाहरी केमिकल या जहर के कारण हो सकता है। पिता अब्दुल्ला डोकाडिया के शरीर में मॉर्फिन भी मिला है, जिसकी जांच की जा रही है कि यह इलाज के लिए था या किसी और वजह से।
पुलिस की जांच और अन्य एंगल
पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज किया है। जांच अब इस तरफ मुड़ गई है कि क्या यह किसी साजिश का हिस्सा है। पुलिस एक पुराने क्रिमिनल केस को भी खंगाल रही है जिसमें अब्दुल्ला डोकाडिया एक अहम गवाह थे। परिवार के साथ मटन पुलाव खाने वाले अन्य रिश्तेदार बीमार नहीं हुए, जिससे बिरयानी के जहरीला होने की संभावना कम लग रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या तरबूज खाने से परिवार की मौत हुई?
FDA की रिपोर्ट के अनुसार तरबूज में कोई मिलावट या आर्टिफिशियल रंग नहीं मिला है। हालांकि, बैक्टीरिया या जहर की जांच अभी जारी है, इसलिए तरबूज को पूरी तरह से कारण नहीं माना जा सकता।
फोरेंसिक रिपोर्ट में क्या खास बात सामने आई है?
मृतकों के अंदरूनी अंगों का रंग हरा पाया गया है और पिता के शरीर में मॉर्फिन मिला है। डॉक्टर इसे सामान्य फूड पॉइजनिंग नहीं मान रहे हैं।