Maharashtra: मुंबई में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ का बड़ा मामला सामने आया है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ प्रैक्टिसिंग पैथोलॉजिस्ट्स एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स (MAPPM) ने दावा किया है कि शहर में करीब 300 ऐसी लैब चल रही हैं
Maharashtra: मुंबई में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ का बड़ा मामला सामने आया है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ प्रैक्टिसिंग पैथोलॉजिस्ट्स एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स (MAPPM) ने दावा किया है कि शहर में करीब 300 ऐसी लैब चल रही हैं, जिनमें कोई क्वालिफाइड पैथोलॉजिस्ट नहीं है। इन लैब के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती को पत्र लिखा गया है।
बिना क्वालिफाइड डॉक्टर के रिपोर्ट जारी करना क्यों है खतरनाक
MAPPM के अध्यक्ष डॉ. संदीप यादव ने बताया कि बिना योग्य देखरेख के चलने वाली लैब मरीजों की जान के लिए बड़ा खतरा हैं। ऐसी लैब से गलत रिपोर्ट आने का डर रहता है, जिससे मरीज का गलत इलाज हो सकता है। इससे न केवल मरीजों की सेहत बिगड़ सकती है और मौत तक हो सकती है, बल्कि आम आदमी पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
क्या कहते हैं नियम और कानून
सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 2017 के फैसले के मुताबिक, लैब की रिपोर्ट सिर्फ एक क्वालिफाइड पैथोलॉजिस्ट ही सर्टिफाई कर सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1961 की धारा 33 के तहत कार्रवाई हो सकती है। यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना गया है।
किन अधिकारियों को भेजी गई शिकायत
पैथोलॉजिस्ट एसोसिएशन ने इस गंभीर मुद्दे पर पुलिस कमिश्नर के साथ-साथ मुख्यमंत्री, BMC कमिश्नर और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल को भी पत्र भेजा है। एसोसिएशन ने याद दिलाया कि इससे पहले परभणी, वाशी, कराड और नागपुर की अदालतों ने भी ऐसे नियमों का उल्लंघन करने वाले लैब संचालकों को सजा सुनाई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई में कितनी लैब के खिलाफ शिकायत की गई है
MAPPM ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में लगभग 300 ऐसी प्रयोगशालाओं का जिक्र किया है जो बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट के काम कर रही हैं।
बिना क्वालिफाइड पैथोलॉजिस्ट के लैब चलाना कौन सा अपराध है
यह महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1961 की धारा 33 के तहत एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के 2017 के आदेश में भी स्पष्ट है।