मुंबई के डॉक्टरों की सलाह: स्तनपान से हर साल बच सकती हैं 8 लाख से ज्यादा शिशुओं की जान

Maharashtra: मुंबई के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्तनपान के महत्व पर जोर दिया है। वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक (1-7 अगस्त) के मौके पर मीरा रोड के Wockhardt Hospitals के विशेषज्ञों ने बताया कि सही समय पर स्तनपान करान

Maharashtra: मुंबई के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्तनपान के महत्व पर जोर दिया है। वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक (1-7 अगस्त) के मौके पर मीरा रोड के Wockhardt Hospitals के विशेषज्ञों ने बताया कि सही समय पर स्तनपान कराने से हर साल 8 लाख से ज्यादा नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकती है। यह तरीका बच्चों की सेहत के लिए सबसे सस्ता और असरदार माना गया है।

Wockhardt Hospitals की कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. नीतू मुंधरा ने कहा कि स्तनपान बच्चे का पहला टीका होता है और यह जीवनभर की सेहत की मजबूत नींव रखता है। उन्होंने सलाह दी कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर ही स्तनपान शुरू कर देना चाहिए और पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इसी तरह Apex Group of Hospitals की डॉ. रसिका वाघ जाधव ने बताया कि शुरुआती एक घंटे में दूध पिलाने से बच्चों को जरूरी एंटीबॉडीज मिलती हैं जिससे उनकी इम्युनिटी बढ़ती है।

भारत सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) भी परिवारों से अपील कर रहा है कि वे ‘गोल्डन ऑवर’ यानी जन्म के पहले घंटे में ही बच्चे को दूध पिलाएं। मंत्रालय ने बताया कि कोलोस्ट्रम (मां का पहला गाढ़ा दूध) बच्चे के लिए प्राकृतिक टीके जैसा काम करता है। वहीं WHO और UNICEF ने भी छह महीने तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद दो साल या उससे ज्यादा समय तक ऊपरी आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सिफारिश की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, WHO के अनुमान के अनुसार सही तरीके से स्तनपान कराने से पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली करीब 4 लाख मौतों को रोका जा सकता है। भारत में इसके लिए ICDS और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी सरकारी योजनाएं काम कर रही हैं। हालांकि, WHO के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में स्तनपान की दरों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसमें भारत में यह दर 2019-21 के 63.7% से गिरकर 2023-24 में 55.8% रह गई है।