Mumbai की डॉक्टर ने दिल्ली पुलिसवाले को डराने के लिए रखा फर्जी अफसर, अब क्राइम ब्रांच ने दाखिल की चार्जशीट

Maharashtra: दक्षिण मुंबई की एक महिला डॉक्टर ने अपने खिलाफ कानूनी कार्रवाई रोकने के लिए एक फर्जी सरकारी अफसर रखा। इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (AEC) ने 23 जून 2026 को 350 पन्नों की चार्जशीट दाख

Maharashtra: दक्षिण मुंबई की एक महिला डॉक्टर ने अपने खिलाफ कानूनी कार्रवाई रोकने के लिए एक फर्जी सरकारी अफसर रखा। इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (AEC) ने 23 जून 2026 को 350 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें डॉक्टर अस्मिता सारंग और उनके साथी मोहम्मद तारिक पठान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

मामला मार्च 2026 का है जब दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल हनुमंतु राजू, कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन से मुंबई आए थे। वह डॉक्टर अस्मिता सारंग के खिलाफ चेक बाउंस (Section 138 Negotiable Instruments Act) के एक मामले में जमानती वारंट तामील कराने आए थे। इस कार्रवाई से बचने के लिए डॉक्टर ने मोहम्मद तारिक पठान को काम पर रखा।

पठान ने खुद को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निजी सचिव (PS) और IAS पवन कुमार यादव बताया। उसने दिल्ली पुलिस के जवान को डराने के लिए फोन कॉल्स किए ताकि पुलिस कार्रवाई रुक जाए। बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि डॉक्टर सारंग ने 24 फरवरी से 3 मार्च 2026 के बीच अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए पठान को 3.38 लाख रुपये दिए थे।

पुलिस ने मार्च 2026 में मोहम्मद तारिक पठान को नवी मुंबई के वाशी इलाके से गिरफ्तार किया था। वहीं, डॉक्टर अस्मिता सारंग के खिलाफ अप्रैल 2026 में मामला दर्ज किया गया। चूंकि अपराध सात साल से कम की सजा वाले थे, इसलिए उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने को कहा गया।

अब क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों पर सरकारी कर्मचारी बनकर धोखा देने, सबूत मिटाने और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या पठान ने किसी अन्य FIR को रोकने के लिए दो डिप्टी पुलिस कमिश्नरों (DCPs) को भी प्रभावित करने की कोशिश की थी।