Maharashtra: मुंबई के दारुखाना इलाके में रहने वाले करीब 500 लोग इस समय खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। न्यू टैंक बंडर रोड पर 12 मई को मुंबई पोर्ट ट्रस्ट अथॉरिटी (MbPA) ने करीब 200 घरों को तोड़ दिया था। अब मानसून की
Maharashtra: मुंबई के दारुखाना इलाके में रहने वाले करीब 500 लोग इस समय खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। न्यू टैंक बंडर रोड पर 12 मई को मुंबई पोर्ट ट्रस्ट अथॉरिटी (MbPA) ने करीब 200 घरों को तोड़ दिया था। अब मानसून की आहट के बीच, इन लोगों ने अपने हक और रहने की जगह के लिए बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है।
क्यों सड़क पर उतरे दारुखाना के निवासी
4 जून को करीब 1,000 लोग अपने अस्थायी ठिकानों से निकलकर री रोड स्टेशन होते हुए आजाद मैदान तक पहुंचे। इन लोगों का कहना है कि वे अपने टूटे हुए घरों के मलबे पर रह रहे हैं और बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। वे सरकार और MbPA से मांग कर रहे हैं कि उनके लिए एक ठोस हाउसिंग रिहैबिलिटेशन पॉलिसी बनाई जाए ताकि उन्हें सिर छुपाने के लिए छत मिल सके।
MbPA और निवासियों के बीच क्या है विवाद
मुंबई पोर्ट ट्रस्ट अथॉरिटी का कहना है कि ये बस्तियां उनकी जमीन पर अवैध कब्जे हैं, इसलिए इन्हें हटाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर रहने वालों के लिए कोई रिहैबिलिटेशन पॉलिसी नहीं है। वहीं, निवासियों का दावा है कि वे यहां तीन-चार पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनके पास 50 साल पुराने दस्तावेज हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ पॉलिसी के खिलाफ है।
नेताओं और संस्थाओं ने क्या कहा
सांसद अरविंद सावंत ने इस कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 2016 में संसद में आश्वासन दिया था कि पोर्ट लैंड पर रहने वालों को स्लम रिहैबिलिटेशन मॉडल के जरिए बसाया जाएगा। सांसद मिलिंद देओरा और विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी प्रशासन से घरों को न तोड़ने और लोगों को बसाने की अपील की थी। इस बीच, इंटर रिलिजियस सॉलिडैरिटी काउंसिल, दादर गुरुद्वारा और इस्कॉन ने बेघर हुए परिवारों को भोजन पहुंचाया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दारुखाना में कितने घर तोड़े गए और कितने लोग प्रभावित हुए
12 मई 2026 को न्यू टैंक बंडर रोड पर करीब 200 घर तोड़े गए, जिससे लगभग 500 लोग बेघर हो गए और सड़क पर आ गए।
निवासी प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं
निवासी मांग कर रहे हैं कि उनके लिए एक हाउसिंग रिहैबिलिटेशन पॉलिसी लाई जाए, क्योंकि वे कई दशकों से वहां रह रहे हैं और उनके पास पुराने दस्तावेज़ भी हैं।