Maharashtra: दक्षिण मुंबई के Darukhana इलाके में मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान में 100 से ज्यादा झोपड़ियां गिरा दी गईं, जिससे करीब 500 लोग बेघर हो गए हैं। भीषण गर्मी के बीच बुजुर्ग और बच्चे
Maharashtra: दक्षिण मुंबई के Darukhana इलाके में मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान में 100 से ज्यादा झोपड़ियां गिरा दी गईं, जिससे करीब 500 लोग बेघर हो गए हैं। भीषण गर्मी के बीच बुजुर्ग और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पुलिस की भारी तैनाती के बीच यह कार्रवाई 12 और 13 मई 2026 को तय की गई थी।
क्यों की गई झोपड़ियों पर कार्रवाई?
Mumbai Port Authority का कहना है कि यह जमीन केंद्र सरकार की है और यहां बसी बस्तियां अवैध अतिक्रमण हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ये निर्माण सुरक्षा के लिए खतरा थे, इसलिए इन्हें हटाना जरूरी था। MbPA ने 17 अप्रैल को ही 120 घरों को नोटिस देकर सात दिन में खाली करने को कहा था। प्रशासन का कहना है कि केंद्र सरकार की जमीन पर रहने वाले लोग महाराष्ट्र सरकार की स्लम रिहैबिलिटेशन पॉलिसी के हकदार नहीं हैं।
बेघर हुए लोगों की क्या है स्थिति?
बुलडोजर चलने के बाद बड़ी संख्या में परिवार सड़क पर आ गए हैं। कई लोग दावा कर रहे हैं कि वे 1995 से पहले से यहां रह रहे हैं। इस मामले में ‘मुंबई पोर्ट घर हक संघर्ष समिति’ लोगों की आवाज उठा रही है। स्थानीय निवासियों ने सिटी सिविल कोर्ट में स्टे ऑर्डर के लिए अपील की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं रुकी। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर किसी ने विरोध किया तो उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी।
नेताओं ने क्या की मांग?
इस मामले में कई बड़े नेता सामने आए हैं। सांसद Arvind Sawant ने मुख्यमंत्री और पुलिस को पत्र लिखकर PMAY-U स्कीम के तहत लोगों के पुनर्वास की मांग की है। सांसद Milind Deora ने भी MbPA चेयरमैन से मानवीय आधार पर रिहैबिलिटेशन पॉलिसी बनाने को कहा है। वहीं विधायक Mangal Prabhat Lodha ने कार्रवाई को टालने का अनुरोध किया था और MbPA अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Darukhana में कितने लोग बेघर हुए हैं?
दक्षिण मुंबई के Darukhana इलाके में 100 से ज्यादा झोपड़ियां गिराए जाने के कारण करीब 500 लोग बेघर हुए हैं, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं।
क्या इन लोगों को सरकारी घर मिलेंगे?
MbPA के अनुसार, ये लोग राज्य सरकार की स्लम पॉलिसी के पात्र नहीं हैं, लेकिन सांसद अरविंद सावंत ने PMAY-U स्कीम के तहत पुनर्वास की मांग की है।