Maharashtra: मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 800 से ज्यादा इमारतों को ‘अति खतरनाक’ और 18,000 से ज्यादा ढां
Maharashtra: मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 800 से ज्यादा इमारतों को ‘अति खतरनाक’ और 18,000 से ज्यादा ढांचों को ‘असुरक्षित’ बताया गया है। मानसून की बारिश आने वाली है और ऐसे में जर्जर दीवारों और कमजोर पिलरों की वजह से हादसे होने का डर बना हुआ है।
इन इलाकों में है सबसे ज्यादा खतरा और क्या है प्रशासन का रुख?
यह संकट सिर्फ मुंबई शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ठाणे, कल्याण-डोम्बिवली, भिवंडी, मीरा-भयंदर और उल्हासनगर जैसे इलाकों में भी फैला है। इनमें से कई इमारतें 30 से 50 साल पुरानी हैं। BMC और अन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश में ये इमारतें गिर सकती हैं। जिन लोगों ने घर खाली करने से मना किया है, वहां प्रशासन पानी और बिजली काटने पर विचार कर रहा है।
लोग घर खाली क्यों नहीं कर रहे हैं और कोर्ट ने क्या कहा?
सबसे बड़ी समस्या ट्रांजिट हाउसिंग यानी अस्थायी मकानों की कमी है। बॉम्बे हाई कोर्ट की एक कमेटी ने बताया कि करीब 4 लाख लोग असुरक्षित घरों में रह रहे हैं, जबकि जरूरत के मुकाबले केवल 500 यूनिट ही उपलब्ध हैं। वहीं, मालाड वेस्ट में BMC द्वारा की गई जल्दबाजी में तोड़फोड़ पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। इसके अलावा, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर स्थित दारुखाना इलाके में भी लोगों को बिना किसी ठोस पुनर्वास नीति के बेघर किया जा रहा है।
पुरानी चॉवल और सरकारी विवाद का क्या असर है?
खेतवाड़ी और लैमिंगटन रोड की 137 साल पुरानी LIC की चॉवलों में करीब 800 लोग रह रहे हैं। इन इमारतों को MHADA ने C1 कैटेगरी (खतरनाक) में रखा है, लेकिन LIC और MHADA के बीच मालिकाना हक और पुनर्विकास को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है। इस विवाद के कारण लोग डर के साये में रहने को मजबूर हैं क्योंकि उनके पास जाने के लिए कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई में कितनी इमारतें खतरनाक बताई गई हैं?
NDTV प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 800 से ज्यादा इमारतें ‘अति खतरनाक’ और 18,000 से ज्यादा ढांचे ‘असुरक्षित’ श्रेणी में रखे गए हैं।
BMC और MHADA ने जर्जर इमारतों के लिए क्या नियम बनाए हैं?
BMC एक्ट की धारा 354 के तहत इमारतों को खतरनाक घोषित किया जाता है और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 265(A) के तहत 30 साल से पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य है।