Maharashtra: मुंबई के दादर और परेल इलाकों में बिजली कटौती की वजह से लोग काफी परेशान रहे। भीषण गर्मी और उमस के बीच कई घंटों तक पावर कट रहा, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ गईं। शहर में बिजली की डिमांड 4,300 MW से 4,540 MW
Maharashtra: मुंबई के दादर और परेल इलाकों में बिजली कटौती की वजह से लोग काफी परेशान रहे। भीषण गर्मी और उमस के बीच कई घंटों तक पावर कट रहा, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ गईं। शहर में बिजली की डिमांड 4,300 MW से 4,540 MW के बीच रहने के कारण नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है।
दादर और परेल में कब-कब गई बिजली?
दादर इलाके में गुरुवार, 14 मई 2026 की सुबह करीब 1.5 घंटे से ज्यादा समय तक बिजली गुल रही। वहीं परेल में बुधवार रात 9 बजे के बाद सप्लाई फेल हुई, जो आधी रात को ठीक हुई लेकिन गुरुवार तड़के फिर से बंद हो गई। BEST अधिकारियों ने दादर की समस्या को सितलादेवी रिसीविंग सबस्टेशन के 33KV फीडर फॉल्ट और लोड बढ़ने की वजह बताया।
बिजली कटौती के मुख्य कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई में बिजली की मांग 4,300MW के पार जाने से वितरण नेटवर्क पर भारी दबाव है। BEST अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि विभाग में कर्मचारियों की कमी है क्योंकि पिछले कुछ सालों में कई लोग रिटायर हो चुके हैं। इसके अलावा, MSEDCL के रखरखाव बजट में भी कमी देखी गई है, जिससे राज्य भर में पावर फेलियर की घटनाएं बढ़ रही हैं।
बिजली गुल होने पर क्या है मुआवजे का नियम?
MERC के नियमों के मुताबिक, अगर रिहायशी ग्राहकों की बिजली समस्या 3 घंटे के भीतर ठीक नहीं होती है, तो वे मुआवजे के हकदार हैं। MSEDCL के मामले में 3 घंटे बाद प्रति घंटा 50 रुपये का मुआवजा मिलता है, जिसकी अधिकतम सीमा 500 रुपये है। नियम यह भी है कि रखरखाव के लिए बिजली काटने से पहले जनता को नोटिस देना जरूरी है और यह कटौती 12 घंटे से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दादर में बिजली कटौती क्यों हुई थी?
BEST अधिकारियों के अनुसार, सितलादेवी रिसीविंग सबस्टेशन के 33KV फीडर में फॉल्ट आने और लोड ज्यादा होने की वजह से गुरुवार सुबह दादर में बिजली गुल हुई थी।
बिजली न आने पर उपभोक्ता कितना मुआवजा पा सकते हैं?
MERC नियमों के अनुसार, रिहायशी उपभोक्ता बिजली ठीक होने में 3 घंटे से ज्यादा की देरी होने पर 50 रुपये प्रति घंटा मुआवजा पा सकते हैं, जो अधिकतम 500 रुपये तक हो सकता है।