Mumbai में साइबर ठगी के 85 पीड़ितों को मिले 10.9 लाख रुपये, पुलिस ने दो नए डिजिटल पोर्टल से किया काम आसान
Maharashtra: मुंबई साइबर पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुए 85 लोगों की बड़ी मदद की है। पुलिस ने सिर्फ चार दिनों के भीतर इन पीड़ितों के 10.9 लाख रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की। यह काम दो नए और अपग्रेड किए गए डिज
Maharashtra: मुंबई साइबर पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुए 85 लोगों की बड़ी मदद की है। पुलिस ने सिर्फ चार दिनों के भीतर इन पीड़ितों के 10.9 लाख रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की। यह काम दो नए और अपग्रेड किए गए डिजिटल पोर्टल के जरिए किया गया, जिससे अब ठगी गई रकम वापस पाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।
गृह मंत्रालय (MHA) ने 12 जून 2026 को Money Restoration Module (MRM) और Grievance Redressal Mechanism (GRM) नाम के दो पोर्टल शुरू किए थे। मुंबई साइबर पुलिस को 14 जून को ट्रेनिंग देने के बाद इन पोर्टल्स का इस्तेमाल शुरू किया गया। 14 से 17 जून के बीच ही 85 लोगों के पैसे वापस मिल गए। डीसीपी (साइबर) बजरंग बनसोडे ने बताया कि इन पोर्टल्स की वजह से पुलिस, बैंक और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के बीच तालमेल बेहतर हुआ है।
इन नए नियमों के तहत अब पीड़ितों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही वकील या कोर्ट की जरूरत होगी। पैसे वापस मिलने की शर्तें इस प्रकार हैं:
| फ्रीज की गई रकम | शर्तें और प्रक्रिया |
|---|---|
| 50,000 रुपये तक (एक अकाउंट में) | बिना FIR या कोर्ट ऑर्डर के, पुलिस रिपोर्ट और ऑनलाइन इंडेमनिटी बॉन्ड के आधार पर वापसी |
| 50,000 से ज्यादा (कई अकाउंट्स में, पर एक में 50k से कम) | पुलिस वेरिफिकेशन के बाद बिना FIR के वापसी संभव |
| 50,000 रुपये से अधिक (एक ही अकाउंट में) | रकम वापस पाने के लिए FIR दर्ज करना अनिवार्य है |
MRM पोर्टल उन लोगों के लिए है जिन्होंने 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत की है और जिनके पास 14 अंकों का एक्नॉलेजमेंट नंबर है। वहीं, GRM पोर्टल उन लोगों की मदद करेगा जिनके बैंक अकाउंट गलती से फ्रीज हो गए हैं, ताकि वे अपनी बात रख सकें और अकाउंट खुलवा सकें। एसटीएफ के सीनियर एसपी अजय सिंह ने कहा कि MRM पोर्टल से पीड़ितों को राहत मिलने की प्रक्रिया अब ज्यादा पारदर्शी और तेज हो गई है।
इसी बीच, 17 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की समीक्षा की। उन्होंने इस हेल्पलाइन को और बेहतर बनाने और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स जोड़ने के निर्देश दिए हैं, ताकि शिकायतों का निपटारा और केस ट्रैकिंग और भी तेजी से हो सके।