Mumbai में रेस्टोरेंट के अंदर घर का खाना खाने पर रोक, कोर्ट ने कहा- यह होटल की पॉलिसी है
Maharashtra: मुंबई के एक उपभोक्ता कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है जिसमें कहा गया है कि रेस्टोरेंट के अंदर बाहर का खाना लाना या खाना होटल के अपने नियमों पर निर्भर करता है। यह मामला तब शुरू हुआ जब एक महिला ने शिकायत की थी
Maharashtra: मुंबई के एक उपभोक्ता कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है जिसमें कहा गया है कि रेस्टोरेंट के अंदर बाहर का खाना लाना या खाना होटल के अपने नियमों पर निर्भर करता है। यह मामला तब शुरू हुआ जब एक महिला ने शिकायत की थी कि रेस्टोरेंट ने उसकी सास को घर का बना खाना खाने से मना कर दिया था।
Mumbai Suburban District Consumer Disputes Redressal Commission ने इस याचिका को खारिज कर दिया। महिला ने तर्क दिया था कि स्वास्थ्य कारणों से उनकी सास को घर का खाना खाना जरूरी था और इसके लिए उन्होंने एक पैथोलॉजी रिपोर्ट भी जमा की थी। लेकिन कोर्ट ने पाया कि उस रिपोर्ट में किसी ऐसी बीमारी या डॉक्टर की सलाह का जिक्र नहीं था जिससे यह साबित हो कि बाहर का खाना उनके लिए खतरनाक है या घर का खाना लाना बहुत जरूरी था।
कोर्ट ने साफ किया कि किसी रेस्टोरेंट द्वारा बाहर के खाने पर रोक लगाना सेवा में कमी या गलत व्यापारिक तरीका नहीं माना जाएगा। यह पूरी तरह से रेस्टोरेंट की अपनी पॉलिसी का हिस्सा है। कमीशन ने यह भी बताया कि होटल और रेस्टोरेंट सिर्फ खाना नहीं बेचते, बल्कि वे बैठने की जगह, टेबल सर्विस, माहौल और मेहमाननवाजी जैसा एक पूरा पैकेज देते हैं। इसी वजह से वे अपनी शर्तों पर काम कर सकते हैं।
इस तरह के नियमों को लेकर पहले भी फैसले आ चुके हैं। जनवरी 2023 में Supreme Court ने सिनेमा हॉल के मामले में भी यही कहा था कि सिनेमा हॉल मालिकों को अपने बिजनेस चलाने के लिए बाहर के खाने पर रोक लगाने का हक है। रेस्टोरेंट को भी अपने परिसर के इस्तेमाल को नियंत्रित करने का अधिकार है, जब तक कि वह किसी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करे या भेदभाव न करे।