Mumbai में कॉलेज ट्रस्टी के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामला, कोर्ट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दिए दोबारा जांच के आदेश

Maharashtra/Mumbai: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कॉलेज ट्रस्टी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने प्रिंसिपल द्वारा लगाए गए आरोपों की ठीक से जांच न

Maharashtra/Mumbai: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कॉलेज ट्रस्टी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने प्रिंसिपल द्वारा लगाए गए आरोपों की ठीक से जांच नहीं की। अब कोर्ट ने जांच अधिकारी को इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया है।

यह मामला एक स्कूल और जूनियर कॉलेज से जुड़ा है। प्रिंसिपल ने आरोप लगाया था कि सितंबर 2017 में संस्थान ज्वाइन करने के कुछ महीनों बाद से ही ट्रस्टी उन्हें शारीरिक, मानसिक और यौन रूप से परेशान करने लगा। शिकायत में गलत तरीके से छूने, आपत्तिजनक मैसेज भेजने और यौन संबंधों की मांग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरसीएफ (RCF) पुलिस ने पहले इस मामले में ‘बी समरी रिपोर्ट’ दाखिल की थी, जिसमें शिकायत को झूठा और फर्जी बताया गया था।

52वें कुर्ला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट डी.एस. शर्मा ने 7 जुलाई 2026 को यह आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर भी सजा दी जा सकती है। इसलिए, किसी भी शिकायत को झूठा बताने से पहले जांच अधिकारी को ठोस कारण देने चाहिए।

कोर्ट ने यह भी पाया कि स्कूल प्रशासन ने प्रिंसिपल के खिलाफ जो विभागीय जांच की थी, वह गैरकानूनी थी क्योंकि उसके लिए शिक्षा विभाग की जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी। कोर्ट ने कहा कि सर्विस विवाद से जुड़ी विभागीय जांच सिविल मामला होता है और इसका असर आपराधिक जांच पर नहीं पड़ना चाहिए। शिकायतकर्ता की तरफ से वकील देवेंद्र शुक्ला ने कोर्ट में पक्ष रखा।