Mumbai में केयरटेकर को कोर्ट ने बताया अवैध कब्जाधारी, दादर के फ्लैट को खाली करने का आदेश

Maharashtra/Mumbai: मुंबई की एक सिविल कोर्ट ने दादर हिंदू कॉलोनी के एक फ्लैट में पिछले दस साल से रह रहे व्यक्ति को तुरंत घर खाली करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि केयरटेकर या घरेलू सहायक के तौर पर काम करने से कि

Maharashtra/Mumbai: मुंबई की एक सिविल कोर्ट ने दादर हिंदू कॉलोनी के एक फ्लैट में पिछले दस साल से रह रहे व्यक्ति को तुरंत घर खाली करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि केयरटेकर या घरेलू सहायक के तौर पर काम करने से किसी को किराएदार के अधिकार नहीं मिल जाते। यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो सुविधा के नाम पर दूसरों के घरों में रहते हैं और बाद में उस पर अपना हक जताने की कोशिश करते हैं।

यह मामला दादर हिंदू कॉलोनी के मंगेश महालक्ष्मी बिल्डिंग के 500 वर्ग फुट के एक फ्लैट से जुड़ा है। अमेरिका में रहने वाले मकान मालिक हेमंत और विनीत सरदार ने 2013 में यह केस दर्ज कराया था। कोर्ट में मधुकर कदम नाम के व्यक्ति ने दावा किया था कि वह मूल किराएदार मीरा तेंदुलकर के परिवार का सदस्य है, इसलिए उसे वहां रहने का अधिकार है। हालांकि, कदम इस दावे के समर्थन में कोई भी पारिवारिक जानकारी या सबूत नहीं दे पाया और दोनों की जातियां भी अलग थीं।

जज ए एच बैग ने अपने फैसले में कहा कि सर्विस रिलेशनशिप को कानूनन पारिवारिक रिश्ता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ राशन कार्ड में नाम होने से कोई व्यक्ति मृतक का रिश्तेदार नहीं बन जाता, क्योंकि राशन कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ राशन लेने के लिए होता है। मधुकर कदम ने तर्क दिया था कि 2011 में मीरा तेंदुलकर ने एक घोषणा पत्र दिया था और वह जॉइंट बैंक अकाउंट से किराया भरता था, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक किसी घर में रहना या मालिक की अनुमति से रहना, उस व्यक्ति को किराएदार नहीं बना देता। एक बार जब मालिक अपनी अनुमति वापस ले लेता है, तो वहां रहने वाले व्यक्ति की स्थिति एक अतिक्रमणकारी या ट्रेसपासर की हो जाती है। इसी आधार पर कोर्ट ने मधुकर कदम और उसके परिवार को अवैध कब्जाधारी मानते हुए फ्लैट खाली करने का आदेश सुनाया।