Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने मारपीट के आरोपी तीन नाबालिगों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि Juvenile Justice Act का मकसद बच्चों को सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें सुधारना है। कोर्ट ने Juvenile Justice Board
Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने मारपीट के आरोपी तीन नाबालिगों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि Juvenile Justice Act का मकसद बच्चों को सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें सुधारना है। कोर्ट ने Juvenile Justice Board के उस फैसले को पलट दिया जिसमें इन बच्चों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
कोर्ट ने जमानत देते समय किन बातों पर जोर दिया?
कोर्ट ने कहा कि बच्चों के मामले में जमानत एक नियम है और इसे मना करना एक अपवाद होना चाहिए। जज ने बताया कि सिर्फ अपराध की गंभीरता को देखकर जमानत नहीं रोकी जा सकती। सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि बाहर आने पर ये बच्चे गलत संगत में पड़ेंगे या उन्हें कोई खतरा होगा। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को तब तक हिरासत में नहीं रखना चाहिए जब तक कि कानून की शर्तें पूरी न हों।
रिहाई के बाद नाबालिगों के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं?
कोर्ट ने बच्चों की रिहाई कुछ जरूरी शर्तों के साथ की है। उनकी माताओं को यह भरोसा दिलाना होगा कि वे बच्चों की सही निगरानी करेंगी और उनकी काउंसलिंग कराएंगी। इसके अलावा, अगले छह महीने तक इन नाबालिगों को Probation Officer की देखरेख में रहना होगा। उन्हें गवाहों से संपर्क करने की मनाही है और बिना इजाजत मुंबई की सीमा से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
Juvenile Justice Act के तहत बच्चों के अधिकार क्या हैं?
Juvenile Justice Act 2015 और 2026 के नए नियमों के मुताबिक, भारत का कानून अब बच्चों के अधिकारों और उनके पुनर्वास पर ज्यादा ध्यान देता है। इस कानून के तहत किसी भी नाबालिग को मौत की सजा या बिना रिहाई वाली उम्रकैद नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने भी 21 अप्रैल 2026 को दोहराया था कि कानून से टकराने वाले बच्चों के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए और उन्हें जेल भेजने के बजाय सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कोर्ट ने नाबालिगों को जमानत देने का मुख्य कारण क्या बताया?
कोर्ट ने कहा कि Juvenile Justice Act का उद्देश्य सुधार करना (Reformative) है, न कि बदला लेना (Retributive)। बच्चों के लिए जमानत एक सामान्य नियम है और इसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही रोका जा सकता है।
रिहा हुए नाबालिगों पर क्या पाबंदियां लगाई गई हैं?
नाबालिगों को 6 महीने तक Probation Officer की निगरानी में रहना होगा, गवाहों से बात नहीं करनी होगी और बिना अनुमति मुंबई शहर नहीं छोड़ना होगा।