Mumbai में यात्री से वसूली और मारपीट के आरोपी 3 बर्खास्त रेलवे पुलिसकर्मियों को मिली जमानत

Maharashtra: मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने शनिवार को तीन बर्खास्त रेलवे पुलिसकर्मियों को जमानत दे दी है। इन पुलिसकर्मियों पर पिछले साल अगस्त में मुंबई सेंट्रल टर्मिनस पर एक यात्री से पैसे वसूलने और उसके साथ मारपीट करने का आर

Maharashtra: मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने शनिवार को तीन बर्खास्त रेलवे पुलिसकर्मियों को जमानत दे दी है। इन पुलिसकर्मियों पर पिछले साल अगस्त में मुंबई सेंट्रल टर्मिनस पर एक यात्री से पैसे वसूलने और उसके साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। यह फैसला कानूनी लड़ाई के एक लंबे दौर के बाद आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने भी दखल दिया था।

यह पूरा मामला 10 अगस्त 2025 को शुरू हुआ था जब राजस्थान के एक ज्वेलर कमलकुमार सोनी और उनकी 8 साल की बेटी के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई थी। इस घटना की एफआईआर 17 अगस्त 2025 को राजस्थान में दर्ज हुई थी, जिसे बाद में जांच के लिए मुंबई की गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) को ट्रांसफर कर दिया गया था।

इस मामले में कानूनी प्रक्रिया काफी उलझी रही, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:

तारीख घटना/कानूनी कार्रवाई
10 अगस्त 2025 मुंबई सेंट्रल पर वसूली और मारपीट की घटना हुई
17 अगस्त 2025 राजस्थान में FIR दर्ज हुई, फिर मुंबई GRP को ट्रांसफर हुई
26 अगस्त 2025 मुंबई सेशन कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
सितंबर 2025 बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरोपियों को अग्रिम जमानत दी
27 मई 2026 सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की जमानत रद्द कर दी
3 जून 2026 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई
20 जून 2026 मुंबई सेशन कोर्ट ने नियमित जमानत मंजूर की

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि जब कानून लागू करने वाले ही वसूली करने लगें, तो आम नागरिक डर जाता है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे पुलिस बल की साख खत्म होती है और लोगों का भरोसा टूटता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश की भी आलोचना की थी जिसमें सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कहा गया था कि पीड़ित संकट में नहीं दिख रहा था।

वहीं, सेशन कोर्ट के जज प्रशांत सी काले ने जमानत देते हुए कहा कि जमानत के समय सबूतों का विस्तृत मूल्यांकन जरूरी नहीं है। कोर्ट ने यह भी देखा कि हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आरोपियों ने किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया था।

जमानत देते समय कोर्ट ने कुछ शर्तें रखी हैं। आरोपी अब इस केस से जुड़े किसी भी व्यक्ति से संपर्क नहीं करेंगे और न ही उन्हें धमकाएंगे। उन्हें हर सुनवाई पर कोर्ट में हाजिर होना होगा और बिना अनुमति के भारत नहीं छोड़ सकते। इस मामले में आरोपी ASI ललित रामचंद्र जगताप (50), हेड कांस्टेबल राहुल दत्ता भोसले (47) और अनिल सीताराम राठौड़ (37) शामिल हैं, जो पहले मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर तैनात थे।