Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन Popular Front of India (PFI) के कथित सदस्य Mohd Iqbal Ibrahim Khan की जमानत याचिका खारिज कर दी है। खान पर देश की सुरक्षा को खतरे में डालने और गैरकानूनी गतिविधियों
Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन Popular Front of India (PFI) के कथित सदस्य Mohd Iqbal Ibrahim Khan की जमानत याचिका खारिज कर दी है। खान पर देश की सुरक्षा को खतरे में डालने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। वह 22 सितंबर 2022 से जेल में बंद है।
कोर्ट ने जमानत देने से क्यों किया इनकार?
जज Chakor Baviskar ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि UAPA की धारा 15 के तहत ‘आतंकवादी कृत्य’ की परिभाषा खान के मामले में सही बैठती है। कोर्ट ने माना कि पेश किए गए सबूतों से यह लगता है कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा था। वहीं, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर Sunil Gonsalves ने दलील दी कि खान एक सक्रिय सदस्य था और बाहर आने पर वह फिर से गैरकानूनी काम कर सकता है।
केस में क्या सबूत पेश किए गए?
NIA ने कोर्ट में कई डिजिटल सबूत पेश किए, जिनमें संदिग्धों के बीच हुई बातचीत के ऑडियो क्लिप शामिल थे। इसके अलावा ‘MH Expansion Circular’ नाम का एक दस्तावेज भी मिला, जिसमें महाराष्ट्र में PFI के विस्तार की योजना थी। आरोपी के मोबाइल फोन से कुछ ऐसे डेटा भी मिले हैं जिनमें धार्मिक स्थलों को लेकर भड़काऊ बातें कही गई थीं।
केस की मुख्य बातें और कानूनी स्थिति
| विवरण |
जानकारी |
| आरोपी का नाम |
Mohd Iqbal Ibrahim Khan |
| लगाया गया कानून |
UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) |
| गिरफ्तारी की तारीख |
22 सितंबर 2022 |
| जांच एजेंसी |
ATS और NIA |
| बचाव पक्ष की दलील |
भूमिका कम थी और कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है |
| कोर्ट का आधार |
UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर रोक |