Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने जाली नोटों के कारोबार और आतंकी गतिविधियों से जुड़े एक पुराने मामले में Usman Hanif Shaikh को बरी कर दिया है। यह मामला साल 2014 का था जब मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन पर हाई-क
Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने जाली नोटों के कारोबार और आतंकी गतिविधियों से जुड़े एक पुराने मामले में Usman Hanif Shaikh को बरी कर दिया है। यह मामला साल 2014 का था जब मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन पर हाई-क्वालिटी जाली नोट चलाने और UAPA के तहत गंभीर आरोप लगाए थे। जज Chakor S Baviskar ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह साबित नहीं हुए हैं।
कोर्ट ने Usman Shaikh को बरी क्यों किया?
स्पेशल कोर्ट ने पाया कि सरकारी वकील आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाए। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जाली नोट आरोपी के पास रखे जा सकते थे या उन्हें प्लांट किया गया होगा। मामले में 9 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि Usman Shaikh ने जाली नोट खरीदे, बेचे या उनका कारोबार किया। सिर्फ नोटों का पास होना तस्करी साबित करने के लिए काफी नहीं है।
केस में किन सबूतों की हुई कमी?
जांच में यह बात सामने आई कि पुलिस ने इस केस को मजबूती से पेश नहीं किया। कोर्ट ने नोट किया कि जिस जगह से आरोपी को पकड़ा गया, वहां का कोई CCTV फुटेज पेश नहीं किया गया। साथ ही, घटना के समय वहां मौजूद किसी भी स्वतंत्र गवाह को कोर्ट में नहीं लाया गया। यह मामला दिसंबर 2014 में क्राइम ब्रांच के एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने शुरू किया था, जिसमें आरोप था कि नोट पश्चिम बंगाल से लाकर मुंबई में चलाए जा रहे थे।
इस केस से जुड़े अन्य लोग कौन थे?
पुलिस ने इस मामले में Adam Nijam Pathan उर्फ Badshah को भी आरोपी बनाया था, जिसके पास से 50 जाली नोट बरामद होने का दावा किया गया था। हालांकि, मार्च 2023 में Adam की मौत हो गई, जिसके बाद उसका केस खत्म हो गया। इस मामले में एक अन्य आरोपी नाबालिग था। अब Usman Shaikh को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Usman Shaikh पर क्या आरोप लगे थे?
उन पर जाली नोटों की तस्करी करने और UAPA कानून के तहत आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। पुलिस का दावा था कि वे हाई-क्वालिटी नकली नोट मुंबई में चला रहे थे।
यह मामला कब शुरू हुआ था?
यह मामला 12 दिसंबर 2014 को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के एंटी-एक्सटॉर्शन सेल द्वारा दर्ज किया गया था।