Maharashtra: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने करीब 30 साल पुराने एक धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के मामले में चार आरोपियों को बरी कर दिया है। यह मामला Laxmi Co-operative Credit Society के फंड में हेराफेरी से जुड़ा था, जिसम
Maharashtra: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने करीब 30 साल पुराने एक धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के मामले में चार आरोपियों को बरी कर दिया है। यह मामला Laxmi Co-operative Credit Society के फंड में हेराफेरी से जुड़ा था, जिसमें करीब 1.64 करोड़ रुपये के गबन का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं किए जा सके।
क्या था पूरा मामला और किन पर थे आरोप?
यह मामला साल 1996 में Economic Offences Wing (EOW) की जनरल ब्रांच ने दर्ज किया था। आरोप था कि 1994 से 1996 के बीच सोसाइटी के 7 से 8 ऑफिस bearers ने मिलकर लगभग 1.64 करोड़ रुपये की रकम निकाली और उससे अपनी अचल संपत्तियां खरीदीं। इस मामले में IPC की धारा 403, 406, 409, 468, 477(A) और 120B के तहत केस चलाया गया था।
किन लोगों को मिली राहत और कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने Raghu Kandjara Suvarna (79), Sadanand Basappa Poojari (70), John Babi Fernandes (66) और Veena Sanatkumar Shetty (61) को बरी कर दिया है। मजिस्ट्रेट S.K. Fokmare ने बताया कि केस पूरी तरह से ऑडिट रिपोर्ट पर टिका था, लेकिन जिस ऑडिटर ने रिपोर्ट बनाई थी और जिसने शिकायत की थी, उन दोनों को कोर्ट में पेश नहीं किया गया। साथ ही, गवाहों में से दो अपने बयान से पलट गए और बाकी गवाहों ने भी कोई ठोस सबूत नहीं दिया।
अन्य आरोपियों का क्या हुआ?
ट्रायल के दौरान पता चला कि दो मुख्य आरोपियों को पहले ही डिस्चार्ज किया जा चुका था। एक आरोपी की मौत के बाद उसके खिलाफ कार्यवाही खत्म हो गई, जबकि दो अन्य आरोपी फरार हैं, इसलिए उनकी सुनवाई अलग से की जा रही है। इस केस में सरकारी पक्ष की ओर से APP Bageshri Bhondave और बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट R.V. Kini और S.S. Bhandary ने दलीलें पेश की थीं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Laxmi Co-operative Credit Society घोटाले में कितने पैसे की हेराफेरी हुई थी?
इस मामले में साल 1994 से 1996 के बीच लगभग 1.64 करोड़ रुपये के फंड की हेराफेरी का आरोप लगाया गया था।
कोर्ट ने आरोपियों को बरी क्यों किया?
कोर्ट ने पाया कि मुख्य ऑडिटर और शिकायतकर्ता कोर्ट में नहीं आए और गवाहों ने आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए।