Mumbai में गैंगस्टर की पत्नी के मर्डर केस में फरार आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा सबूतों की कमी
Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने साल 2000 में हुई बीएमसी कॉर्पोरेटर नीता नायक की हत्या के मामले में फरार आरोपी धर्मेंद्रसिंह चौधरी उर्फ धर्मेश को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि सरकारी वकील आरोपी और इस पूरी साजि
Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने साल 2000 में हुई बीएमसी कॉर्पोरेटर नीता नायक की हत्या के मामले में फरार आरोपी धर्मेंद्रसिंह चौधरी उर्फ धर्मेश को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि सरकारी वकील आरोपी और इस पूरी साजिश के बीच कोई ठोस संबंध साबित नहीं कर पाए। नीता नायक, कथित गैंगस्टर अश्विन नायक की पत्नी थीं, जिनकी उनके चिनचपोकली स्थित घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
यह पूरा मामला काफी पुराना है। उस वक्त अश्विन नायक दिल्ली की तिहार जेल में बंद थे और आरोप था कि उन्होंने ही अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रची थी। धर्मेंद्रसिंह चौधरी इस मामले में लंबे समय से फरार थे, इसलिए उनका ट्रायल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत उनकी अनुपस्थिति में चलाया गया।
स्पेशल जज सत्यनारायण आर. नवंदर ने अपने फैसले में साफ कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह पता चले कि आरोपी ने अपराध में इस्तेमाल होने वाले हथियार दिलाए हों या हमलावरों को शरण दी हो। कोर्ट के मुताबिक, धर्मेंद्रसिंह की इस साजिश में भागीदारी या अपराध को अंजाम देने में किसी भी तरह की मदद करने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी को MCOCA (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के आरोपों से भी मुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि वह अश्विन नायक के संगठित अपराध सिंडिकेट का हिस्सा था, इसका कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि कोर्ट ने यह माना कि नीता नायक की मौत हत्या थी, लेकिन धर्मेंद्रसिंह का इस जुर्म से कोई लेना-देना साबित नहीं हुआ और किसी गवाह ने भी उसका नाम नहीं लिया।
इस केस में पहले 2009 में अश्विन नायक और किशोर राजपूत को बरी किया जा चुका था। वहीं, मनोज भालेकर, नीलरतन मुखर्जी और सुनील जाधव को इस हत्या का दोषी पाया गया था, जिनमें से सुनील जाधव की बाद में एक एनकाउंटर में मौत हो गई थी।