Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने भिवंडी के डॉक्टर Arshad Shaikh को 15 साल पुराने एक मामले में बरी कर दिया है। डॉक्टर पर एक महिला की ब्रेस्ट कैंसर की रिपोर्ट फर्जी बनाने का आरोप था। कोर्ट ने जांच में कमियां और सबूतों की
Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने भिवंडी के डॉक्टर Arshad Shaikh को 15 साल पुराने एक मामले में बरी कर दिया है। डॉक्टर पर एक महिला की ब्रेस्ट कैंसर की रिपोर्ट फर्जी बनाने का आरोप था। कोर्ट ने जांच में कमियां और सबूतों की कमी को देखते हुए यह फैसला सुनाया है।
क्या था पूरा मामला और आरोप
यह मामला साल 2010 का है जब भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी। डॉक्टर Arshad Shaikh पर आरोप था कि उन्होंने Tata Memorial Hospital (TMH) के लेटरहेड का इस्तेमाल कर Devaki Pujari नाम की महिला की फर्जी कैंसर रिपोर्ट तैयार की। उस समय TMH के तत्कालीन डायरेक्टर Dr. Rajan Badwe ने इस रिपोर्ट को कंप्यूटर की चालाकी बताया था और इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया था।
कोर्ट ने बरी करने का क्या कारण बताया
Judicial Magistrate First Class P.S. Shinde ने 13 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि डॉक्टर ने खुद जांच की थी और रिपोर्ट बनाई थी। कोर्ट ने पाया कि जांच में काफी लापरवाही हुई और धोखाधड़ी के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। खास बात यह रही कि जिस महिला की रिपोर्ट का मामला था, उसे ट्रायल के दौरान गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया।
डॉक्टर पर लगे थे कौन से आरोप
डॉक्टर Arshad Shaikh पर जालसाजी, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। इस कानूनी लड़ाई में करीब 15 साल का समय लगा, जिसके बाद अब उन्हें इन सभी आरोपों से क्लीन चिट मिल गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डॉक्टर Arshad Shaikh पर क्या आरोप थे?
उन पर आरोप था कि उन्होंने Tata Memorial Hospital के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर एक महिला की ब्रेस्ट कैंसर रिपोर्ट बनाई थी।
कोर्ट ने डॉक्टर को बरी क्यों किया?
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष धोखाधड़ी के आरोपों को साबित नहीं कर पाया और जांच में कई खामियां थीं।