Mumbai में पुरानी इमारतों के मलबे से बनेगा नया निर्माण सामान, BMC और MHADA ने बनाए कड़े नियम

Maharashtra: मुंबई में इन दिनों पुरानी इमारतों और हाउसिंग सोसायटियों के पुनर्विकास (Redevelopment) का काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान निकलने वाले भारी मलबे को अब कचरा मानने के बजाय निर्माण के लिए कीमती कच्चे माल की तरह इ

Maharashtra: मुंबई में इन दिनों पुरानी इमारतों और हाउसिंग सोसायटियों के पुनर्विकास (Redevelopment) का काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान निकलने वाले भारी मलबे को अब कचरा मानने के बजाय निर्माण के लिए कीमती कच्चे माल की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस मलबे को सही तरीके से रीसायकल किया गया, तो यह शहर के लिए एक ‘मटेरियल्स माइन’ यानी संसाधनों की खान साबित होगा।

मुंबई में हर दिन करीब 8,000 टन निर्माण मलबा निकलता है, जो घरेलू कचरे से भी ज्यादा है। इस समस्या से निपटने के लिए BMC और महाराष्ट्र सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। अब डेवलपर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए कचरे को अलग-अलग करना अनिवार्य कर दिया गया है। खुदाई के सामान और निर्माण के मलबे को मिलाना अब मना है। साथ ही, मलबे को ले जाने वाले वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTMS) लगाना जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि मलबा सही जगह जा रहा है या नहीं। नियम तोड़ने वाले वाहनों पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

MHADA ने भी अपने प्रोजेक्ट्स के लिए मलबे के निपटारे की शर्तें तय की हैं। 20 मीट्रिक टन से ज्यादा मलबा होने पर डेवलपर्स को ऑनलाइन वेस्ट मैनेजमेंट प्लान देना होगा, जबकि कम मलबे के लिए ‘डेब्रिस ऑन कॉल’ सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। वहीं, MMRDA के नेतृत्व में एक टेक्निकल कमेटी बनाई गई है जो पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए कचरा निपटान की नई पॉलिसी तैयार कर रही है।

तारीख/नियम मुख्य विवरण
1 अप्रैल 2026 EPR फ्रेमवर्क लागू, डेवलपर्स को BMC के पास रजिस्ट्रेशन और रीसाइक्लिंग टारगेट पूरा करना होगा।
25 अप्रैल 2026 SOP लागू, सोर्स पर कचरा अलग करना और वाहनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग अनिवार्य।
23 मई 2026 BMC द्वारा डिजिटल डैशबोर्ड का प्रस्ताव, ताकि मलबे के उत्पादन और निपटान की जानकारी रहे।
2 जुलाई 2026 MMRDA के तहत टेक्निकल कमेटी का गठन, नई पॉलिसी और नियमों के लिए।
10 जुलाई 2026 MHADA एक्ट में संशोधन के लिए बिल पेश, ताकि 13,000 से ज्यादा पुरानी इमारतों का पुनर्विकास आसान हो सके।

आर्किटेक्ट मोय्यद फतेही जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि इस मलबे का दोबारा इस्तेमाल करने से लैंडफिल पर दबाव कम होगा और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। BMC के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के डिप्टी कमिश्नर किरण दिघवकर ने बताया कि शहर में निजी कंपनियों को मलबा प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा, एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर डॉ. अश्विनी जोशी ने सभी वार्डों को सफाई व्यवस्था सुधारने और स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 की रैंकिंग बेहतर करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।