Mumbai City के स्कूलों का जलवा, Suburbs के मुकाबले पढ़ाई में रहे आगे; सरकारी इंडेक्स में आया बड़ा अंतर

Maharashtra: मुंबई शहर के स्कूलों ने पढ़ाई-लिखाई के मामले में उपनगरों (Suburbs) को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक इंडेक्स में यह बात सामने आई है कि बुनियादी तौर पर पढ़ने और गणित की समझ

Maharashtra: मुंबई शहर के स्कूलों ने पढ़ाई-लिखाई के मामले में उपनगरों (Suburbs) को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक इंडेक्स में यह बात सामने आई है कि बुनियादी तौर पर पढ़ने और गणित की समझ में मुंबई सिटी के छात्र काफी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। जहाँ मुंबई सिटी ने पूरे राज्य में छठा स्थान हासिल किया है, वहीं मुंबई Suburban जिला परभणी और गडचिरोली जैसे कम प्रदर्शन करने वाले जिलों की लिस्ट में शामिल हो गया है।

केंद्र सरकार ने 7 जुलाई 2026 को शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए Performance Grading Index for Districts (PGI-D) जारी किया। इस इंडेक्स के लिए UDISE+, PARAKH और PM POSHAN जैसे सरकारी पोर्टल्स के डेटा का इस्तेमाल किया गया। इस फ्रेमवर्क में कुल 600 अंकों के आधार पर 70 अलग-अलग संकेतकों की जांच की गई, जिसमें डिजिटल लर्निंग, बुनियादी ढांचा और सीखने के परिणामों जैसे विषय शामिल थे।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई सिटी के पुराने और प्रतिष्ठित स्कूलों ने समय के साथ खुद को बदला है और उन्हें बेहतर संसाधन मिले हैं। वहीं, मुंबई Suburban के स्कूलों में आने वाले छात्रों की पृष्ठभूमि काफी अलग होती है। यहाँ पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी (first-generation learners) ज्यादा हैं, जिसका असर उनके सीखने के स्तर पर पड़ता है। इसके अलावा, उपनगरों के नए स्कूलों को अपनी पहचान बनाने और स्तर सुधारने में समय लगता है।

दिलचस्प बात यह है कि पढ़ाई के नतीजों में पीछे रहने के बावजूद मुंबई Suburban ने ‘डिजिटल लर्निंग’ के मामले में मुंबई सिटी को पछाड़ दिया है। यहाँ कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम और इंटरनेट जैसी सुविधाओं का स्तर बेहतर पाया गया। साथ ही स्कूल के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के मामले में भी उपनगर बेहतर रहे।

पूरे महाराष्ट्र की बात करें तो राज्य के कुल स्कोर में मामूली सुधार हुआ है। राज्य के लिए ‘इक्विटी’ वाला हिस्सा सबसे मजबूत रहा, लेकिन सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) और स्कूलों की सुविधाओं के मामले में महाराष्ट्र अभी भी काफी पीछे है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में भी यह बात कही गई कि माध्यमिक स्तर पर छात्रों का स्कूल छोड़ना और सीखने की क्षमता कमजोर होना एक बड़ी चुनौती है।