Mumbai के CEO ने 16 दिन तक बंद रखा फोन और इंटरनेट, वापसी पर मिले 3000 मैसेज और 2000 ईमेल
Finance: Piramal Finance के Managing Director और CEO Jairam Sridharan ने हाल ही में एक अनोखा अनुभव साझा किया है। उन्होंने 16 दिनों के लिए डिजिटल दुनिया और काम से पूरी तरह दूरी बना ली थी। इस दौरान उन्होंने न तो फोन इस्तेम
Finance: Piramal Finance के Managing Director और CEO Jairam Sridharan ने हाल ही में एक अनोखा अनुभव साझा किया है। उन्होंने 16 दिनों के लिए डिजिटल दुनिया और काम से पूरी तरह दूरी बना ली थी। इस दौरान उन्होंने न तो फोन इस्तेमाल किया और न ही इंटरनेट, जिसे डिजिटल डिटॉक्स कहा जाता है।
Jairam Sridharan ने LinkedIn पर बताया कि जब वह 16 दिन बाद वापस लौटे, तो उनके पास 3,000 अनरीड मैसेज, 2,000 ईमेल और सैकड़ों मिस्ड कॉल थे। लेकिन उन्होंने यह महसूस किया कि उनके बिना भी दुनिया का सारा काम ठीक से चलता रहा। उनकी इस बात ने कॉर्पोरेट जगत में वर्क-लाइफ बैलेंस और मानसिक सेहत पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
मुंबई की साइबर सिक्योरिटी फर्म CyberFrat के CEO Gaurav Batra ने भी इसी तरह का कदम उठाया था। उन्होंने 25 दिसंबर से 4 जनवरी तक अपने कर्मचारियों के लिए 11 दिन का डिजिटल डिटॉक्स लागू किया था। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों की एकाग्रता बढ़ती है और वे बेहतर फैसले ले पाते हैं, जिससे बर्नआउट की समस्या कम होती है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस कदम का समर्थन किया है। कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई के साइकियाट्री कंसल्टेंट Dr. Parth Nagda और Dr. Aravind Thampi के अनुसार, इंटरनेट से दूरी बनाने से तनाव कम होता है, नींद की क्वालिटी सुधरती है और आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं। Dr. Nagda ने कहा कि ऑनलाइन विवादों और नकारात्मक खबरों से दूर रहने से मानसिक शांति मिलती है।
इसी बीच भारत सरकार भी कर्मचारियों की सेहत को लेकर गंभीर है। संसद में ‘Right to Disconnect Bill 2025’ पर चर्चा चल रही है। इस बिल का मकसद कर्मचारियों को ऑफिस के समय के बाद काम के मैसेज या कॉल से बचने का कानूनी अधिकार देना है।
- Right to Disconnect Bill 2025: यह बिल कर्मचारियों को ऑफिस समय के बाद स्विच ऑफ होने की आजादी देगा।
- Employees’ Welfare Authority: इस बिल में एक अथॉरिटी बनाने का प्रावधान है जो यह देखेगी कि कंपनियां नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।
- पेनल्टी का प्रावधान: जो कंपनियां ऑफिस के बाद भी कर्मचारियों पर काम का दबाव डालेंगी, उन पर जुर्माना लग सकता है।
भारत में इस विचार की शुरुआत पहले भी हुई थी। 2019 में सांसद सुप्रिया सुले और केरल विधानसभा में N Jayaraj ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए इस अधिकार की मांग उठाई थी।