Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में सात लोगों को तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला SBI के फर्जी वेरिफिकेशन और 500 से ज्यादा जाली लेटरहेड के इस्तेमाल से जुड़ा है, जि
Maharashtra: मुंबई की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में सात लोगों को तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला SBI के फर्जी वेरिफिकेशन और 500 से ज्यादा जाली लेटरहेड के इस्तेमाल से जुड़ा है, जिसमें करीब 8.64 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था।
कैसे किया गया यह बड़ा फर्जीवाड़ा?
इस घोटाले की शुरुआत मई 2010 में हुई थी जब SBI के एक असिस्टेंट मैनेजर ने PNB की सोलापुर ब्रांच में हुई धोखाधड़ी की शिकायत CBI से की थी। जालसाजों ने बैंक के फोन नंबर का गलत इस्तेमाल किया और कूरियर एजेंसी के जरिए फर्जी दस्तावेज भिजवाए। उन्होंने खुद को बैंक अधिकारी ‘पांडे’ बताया, जबकि बैंक में उस नाम का कोई अधिकारी था ही नहीं। असली पहचान छिपाने के लिए उन्होंने SBI के 500 से ज्यादा नकली लेटरहेड छपवाए थे, जिसे बनवाने के लिए ग्राफिक डिजाइनर और प्रिंटिंग शॉप वालों की मदद ली गई थी।
किन्हें मिली सजा और क्या है कोर्ट का फैसला?
कोर्ट ने सबूतों के आधार पर सात लोगों को दोषी पाया है। सजा पाने वालों के नाम इस प्रकार हैं:
| दोषी व्यक्ति का नाम |
सजा |
| राजेंद्र शेलके |
3 साल कैद |
| रमेश तिवारी |
3 साल कैद |
| सतीश पुजारी |
3 साल कैद |
| अखिलेश पांडे |
3 साल कैद |
| पद्माकर चव्हाण |
3 साल कैद |
| अनूप रॉय |
3 साल कैद |
| नितिन काकड़े |
3 साल कैद |
कोर्ट ने बताया कि इन सभी की सजा फिलहाल निलंबित कर दी गई है ताकि वे इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकें। इस मामले में एक व्यक्ति को बरी भी किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह बैंक फ्रॉड किस साल शुरू हुआ था?
यह मामला मई 2010 का है, जब SBI के एक असिस्टेंट मैनेजर ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सोलापुर शाखा में हुई धोखाधड़ी की शिकायत CBI से की थी।
धोखाधड़ी करने वालों ने कौन सा तरीका अपनाया था?
आरोपियों ने 500 से ज्यादा जाली लेटरहेड बनाए, कूरियर के जरिए फर्जी दस्तावेज भेजे और फोन पर खुद को बैंक अधिकारी बताकर PNB सोलापुर ब्रांच को झांसे में लिया था।