Mumbai में बिल्डर Akhtar Rizvi पर धोखाधड़ी का केस, मौत के 11 साल बाद दादी के फर्जी दस्तखत से बेची जमीन
Maharashtra/Mumbai: बांद्रा के रहने वाले बिल्डर Akhtar Rizvi और उनके स्टाफ के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक 74 साल के बुजुर्ग ने आरोप लगाया है कि बिल्डर ने उनकी दादी के फर्जी कागजात बनवाकर
Maharashtra/Mumbai: बांद्रा के रहने वाले बिल्डर Akhtar Rizvi और उनके स्टाफ के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक 74 साल के बुजुर्ग ने आरोप लगाया है कि बिल्डर ने उनकी दादी के फर्जी कागजात बनवाकर उनकी संपत्ति हड़प ली। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सेल डीड का इस्तेमाल किया गया, उस पर हस्ताक्षर उनकी दादी की मौत के 11 साल बाद किए गए थे।
इस मामले की शिकायत अब्दुल जब्बार रमजान उर्फ रमजू शेख ने दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने साल 1957 में उनकी दादी हजानी नूरबीबाई कालू के नाम पर एक जमीन खरीदी थी। इस प्लॉट पर 1962 में ‘राहेनाम अल्लाह का मंजिल’ नाम की एक बिल्डिंग भी बनाई गई थी। शिकायत के मुताबिक, उनकी दादी अनपढ़ थीं और केवल अंगूठे के निशान का इस्तेमाल करती थीं। उनकी मौत 7 जनवरी 1968 को हो गई थी, लेकिन RTI के जरिए मिले दस्तावेजों से पता चला कि साल 1979 में एक फर्जी सेल डीड के जरिए यह प्रॉपर्टी Rizvi Estates and Hotels Pvt. Ltd. के नाम कर दी गई।
पीड़ित का आरोप है कि रजिस्ट्री अधिकारियों के सामने किसी दूसरे व्यक्ति को उनकी दादी बताकर पेश किया गया और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। परिवार के सदस्यों के बीच इस संपत्ति को लेकर विवाद साल 2022 में शुरू हुआ, जिसके बाद जब कागजात खंगाले गए तो इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
इस मामले में बांद्रा पुलिस ने Akhtar Rizvi और उनके कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और फर्जी दस्तावेज बनाने की धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। जब इस बारे में The Times of India ने Akhtar Rizvi से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।