Mumbai में पेड़ काटने के प्रस्तावों पर बवाल, पार्षदों ने शहर के अंदर ही लगाने की उठाई मांग

Maharashtra: मुंबई में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की तैयारी है, जिससे शहर के पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। शुक्रवार को BMC की Tree Authority की बैठक में जब पेड़ काटने और उन्हें शिफ्ट करने के

Maharashtra: मुंबई में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की तैयारी है, जिससे शहर के पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। शुक्रवार को BMC की Tree Authority की बैठक में जब पेड़ काटने और उन्हें शिफ्ट करने के प्रस्ताव आए, तो अलग-अलग पार्टियों के पार्षदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि शहर के पेड़ काटकर उनकी भरपाई शहर के बाहर भिवांडी, पालघर और पनवेल जैसे इलाकों में करना गलत है, क्योंकि इससे मुंबई की अपनी हरियाली खत्म हो जाएगी।

बैठक में Tree Authority की सदस्य हेतल गाला और BJP नेता गणेश खानकर ने जोर देकर कहा कि नए पेड़ मुंबई की सीमा के अंदर ही लगाए जाने चाहिए। गणेश खानकर ने सुझाव दिया कि मेट्रो स्टेशनों और फ्लाईओवरों के नीचे खाली पड़ी जगहों का इस्तेमाल पेड़ लगाने के लिए किया जा सकता है। वहीं, पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने MMRDA के ईस्टर्न फ्रीवे विस्तार प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने का विरोध किया और आधुनिक ट्रांसप्लांटेशन तकनीक अपनाने की सलाह दी।

शहर में कई ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स हैं जिनके लिए हजारों पेड़ों की बलि दी जा रही है। इनमें गोरेगांव (वेस्ट) के मोतीलाल नगर क्लस्टर पुनर्विकास प्रोजेक्ट में 89 पेड़ काटने और 131 को शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। वहीं, चेडा नगर से ठाणे के आनंद नगर तक ईस्टर्न फ्रीवे के विस्तार के लिए 320 पेड़ काटे जाएंगे और 386 को शिफ्ट किया जाएगा। सबसे ज्यादा असर कोस्टल रोड (उत्तर) और दहिसर-भायंदर एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट्स का है, जहां करीब 9,904 पेड़ प्रभावित होंगे और उनकी भरपाई के लिए लगभग 70,000 पेड़ लगाने की बात कही गई है।

महाराष्ट्र सरकार की 18 नवंबर 2025 की पॉलिसी के मुताबिक, मुंबई में जगह की कमी के कारण MMR क्षेत्र में पेड़ लगाने की छूट दी गई है। इस नियम के तहत कम से कम 12 फीट ऊंचे पौधे लगाने होंगे और अगले सात साल तक उनकी देखभाल सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ता आनंद पेंढारकर और अन्य एक्सपर्ट्स का मानना है कि शहर के बाहर पेड़ लगाने से मुंबई के स्थानीय इकोसिस्टम को कोई फायदा नहीं होगा। प्रशासन का कहना है कि मुंबई में 30-40 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए कल्याण और पनवेल जैसे इलाकों का सहारा लेना पड़ रहा है।