Maharashtra: मुंबई शहर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए BMC एक नई योजना पर काम कर रही है। प्रशासन शहर में डॉग शेल्टर बनाने के लिए NGO की तलाश कर रहा है। इस काम के लिए DBOT मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें
Maharashtra: मुंबई शहर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए BMC एक नई योजना पर काम कर रही है। प्रशासन शहर में डॉग शेल्टर बनाने के लिए NGO की तलाश कर रहा है। इस काम के लिए DBOT मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें संस्थाएं शेल्टर बनाएंगी और उन्हें चलाएंगी।
BMC ने आवेदन की समय सीमा क्यों बढ़ाई?
BMC ने शुरुआत में मुंबई के तीन अलग-अलग इलाकों में शेल्टर बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे थे। लेकिन इस बार NGOs की तरफ से बहुत कम रिस्पॉन्स मिला, जिसकी वजह से आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। प्रशासन चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा योग्य संस्थाएं इस काम में आगे आएं ताकि कुत्तों के रहने और देखभाल का सही इंतजाम हो सके।
Mulund में मिली नई जमीन, क्या होगा फायदा?
प्रशासन ने Mulund में जमीन का एक और टुकड़ा पहचाना है। इस जगह का इस्तेमाल उन आवारा कुत्तों को रखने के लिए किया जाएगा जिन्हें सरकारी या सार्वजनिक संस्थानों से पकड़ा गया है। इससे शहर के अन्य हिस्सों में कुत्तों की भीड़ कम होगी और उन्हें एक सुरक्षित जगह मिल सकेगी।
DBOT मॉडल के तहत कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
इस पूरे प्रोजेक्ट को Design-Build-Operate-Transfer (DBOT) मॉडल पर चलाया जाएगा। इसका मतलब है कि चुनी गई NGO शेल्टर का डिजाइन तैयार करेगी, उसे बनाएगी और एक तय समय तक उसका संचालन करेगी। इसके बाद इसे वापस BMC को सौंप दिया जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
BMC डॉग शेल्टर के लिए किस मॉडल का इस्तेमाल कर रही है?
BMC इसके लिए Design-Build-Operate-Transfer (DBOT) मॉडल का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें NGO शेल्टर का निर्माण और संचालन करेंगे।
Mulund की जमीन का उपयोग किस लिए किया जाएगा?
Mulund में पहचानी गई जमीन का उपयोग सार्वजनिक संस्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को रखने के लिए किया जाएगा।