Mumbai में पानी की किल्लत के बीच अरब सागर में बहाया गया 10 दिन का पीने का पानी, BMC के फैसले पर उठे सवाल
Maharashtra: मुंबई में एक तरफ लोग पानी की कटौती झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर ने महज 8 दिनों में इतना पानी समुद्र में बहा दिया जो पूरे शहर की 10 दिन की जरूरत के बराबर था। यह पूरा मामला 30 जून से 7 जुलाई 2026 के बीच का
Maharashtra: मुंबई में एक तरफ लोग पानी की कटौती झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर ने महज 8 दिनों में इतना पानी समुद्र में बहा दिया जो पूरे शहर की 10 दिन की जरूरत के बराबर था। यह पूरा मामला 30 जून से 7 जुलाई 2026 के बीच का है, जब भारी बारिश के दौरान शहर को डूबने से बचाने के लिए BMC ने यह कदम उठाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में इन 8 दिनों में 898 mm बारिश हुई, जो जुलाई महीने की औसत बारिश से भी ज्यादा थी। शहर को बाढ़ से बचाने के लिए BMC ने अपने 19 पंपिंग स्टेशनों का इस्तेमाल किया और 4,290.5 करोड़ लीटर पानी अरब सागर और खाड़ियों में पंप कर दिया। यह मात्रा आठ पवई झीलों की कुल क्षमता के बराबर है।
हैरानी की बात यह है कि मुंबई में रोजाना 400 MLD पानी की कमी रहती है। शहर अपनी पानी की जरूरतों के लिए विहार, तुलसी, भातसा, तानसा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा और मोदक सागर जैसी सात झीलों पर निर्भर है। 2 अगस्त 2026 तक इन झीलों का जलस्तर 89.08% तक पहुंच गया है, जिसमें मोदक सागर और विहार झील पूरी तरह भर चुकी हैं। इसके बावजूद, 15 मई से लागू 10% पानी की कटौती अभी भी जारी है। औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए यह कटौती 17 जून से बढ़ाकर 20% कर दी गई है।
BMC का कहना है कि नए बांध बनाना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। वहीं, हाइड्रोलॉजिस्ट का मानना है कि नए बांध बनाने के बजाय स्थानीय स्तर पर बारिश के पानी को इकट्ठा करना ज्यादा आसान और सही तरीका है। हिरनंदानी ग्रुप के एमडी डॉ. निरंजन हिरनंदानी ने कहा कि मुंबई में पानी की कमी पानी की अनुपलब्धता की वजह से नहीं, बल्कि इसे रीसायकल और दोबारा इस्तेमाल करने के सही सिस्टम न होने की वजह से है।
भविष्य की जरूरतों के लिए BMC अब नए विकल्पों पर काम कर रही है। मनोरी में एक डिसैलिनेशन प्लांट लगाने की तैयारी है जिससे 400 MLD पानी मिलेगा। इसके अलावा गरगई बांध और वर्सोवा में एक और डिसैलिनेशन प्लांट के जरिए कुल 1,040 MLD अतिरिक्त पानी जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि झीलों पर निर्भरता कम हो सके।