Mumbai में BMC चुनाव के बाद अधिकारियों और पार्षदों के बीच ठनी, काम में आ रही है रुकावट

Maharashtra: मुंबई में चार साल के लंबे प्रशासनिक शासन के बाद अब चुनी हुई सरकार वापस आई है, लेकिन यहां काम करने के तरीके को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। BMC के नए पार्षदों का आरोप है कि चुनाव बीते कई महीने हो गए, फिर भी अध

Maharashtra: मुंबई में चार साल के लंबे प्रशासनिक शासन के बाद अब चुनी हुई सरकार वापस आई है, लेकिन यहां काम करने के तरीके को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। BMC के नए पार्षदों का आरोप है कि चुनाव बीते कई महीने हो गए, फिर भी अधिकारी अभी भी उसी ‘एडमिनिस्ट्रेटर मोड’ में काम कर रहे हैं जैसे वे अकेले ही फैसले लेते थे। इस वजह से चुने हुए प्रतिनिधियों और नौकरशाहों के बीच पावर स्ट्रगल देखने को मिल रहा है।

हाल ही में BMC की लॉ कमेटी की चेयरपर्सन और शिव सेना पार्षद दीक्षा करकर ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाया। उन्होंने दुकानों पर मराठी साइनबोर्ड लगाने के अनुरोध पर कोई जवाब न मिलने के बाद म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिडे की शिकायत सीधे उद्योग और मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत से की। करकर ने बताया कि उन्होंने 1 जून को पत्र भेजा था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला।

सिर्फ साइनबोर्ड ही नहीं, आम जनता के काम भी इस खींचतान की वजह से प्रभावित हो रहे हैं। 20 जुलाई को हुई जनरल बॉडी मीटिंग में अलग-अलग पार्टियों के पार्षदों ने जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) जारी करने और उनमें सुधार करने में हो रही भारी देरी का मुद्दा उठाया। एडिशनल कमिश्नर विपिन शर्मा ने माना कि फर्जीवाड़े की जांच के कारण करीब 19,000 सर्टिफिकेट रद्द किए गए हैं, जिससे सिस्टम में जाम लग गया है। उन्होंने इसे शुरुआती दिक्कतें बताया और कहा कि इसे ठीक किया जा रहा है।

नगर निगम के भीतर राजनीतिक टकराव भी बढ़ रहा है। 16 जुलाई को एक रोड-वाइडनिंग प्रस्ताव को ‘अर्जेंट’ दर्जा देने की कोशिश पर हंगामा हुआ और विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का कहना था कि ऐसे प्रस्तावों के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो सत्ताधारी महायुति गठबंधन के पास नहीं है। इसके बाद मेयर रितु तावडे ने इस प्रस्ताव को बाद की विशेष बैठक में चर्चा के लिए टाल दिया।

वहीं, चेंबूर में एक पेड़ गिरने से 11 साल के बच्चे की मौत के मामले में मेयर रितु तावडे ने जांच पैनल की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। पार्षदों ने रिपोर्ट पर नाराजगी जताई थी कि इसमें अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय नहीं की गई, जिसके बाद मेयर ने नई जांच के आदेश दिए।

बता दें कि 15 जनवरी 2026 को हुए चुनावों में बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी और शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) को 29 सीटें मिलीं। शिव सेना (UBT) 65 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनी। हालांकि, 1888 के मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के कारण मेयर का पद काफी हद तक औपचारिक है और असली ताकत आईएएस रैंक के म्युनिसिपल कमिश्नर के पास होती है, जिससे यह टकराव और बढ़ रहा है।