Mumbai में पेड़ गिरने की घटनाओं पर BMC कमिश्नर का बयान, कहा- सिर्फ कंक्रीटीकरण को जिम्मेदार ठहराना गलत
Maharashtra: मुंबई में मानसून के दौरान लगातार गिर रहे पेड़ों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस मुद्दे पर BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने कहा है कि शहर में पेड़ गिरने की घटनाओं के लिए सिर्फ कंक्रीटीकरण को जिम्मेदार मानना एक जल
Maharashtra: मुंबई में मानसून के दौरान लगातार गिर रहे पेड़ों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस मुद्दे पर BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने कहा है कि शहर में पेड़ गिरने की घटनाओं के लिए सिर्फ कंक्रीटीकरण को जिम्मेदार मानना एक जल्दबाजी भरा बयान होगा। उन्होंने साफ किया कि इस स्तर पर यह कहना सही नहीं है कि सड़कों के कंक्रीटीकरण की वजह से ही पेड़ गिर रहे हैं।
कमिश्नर ने बताया कि फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो सीधे तौर पर कंक्रीटीकरण को पेड़ गिरने से जोड़ता हो, क्योंकि पेड़ आमतौर पर फुटपाथ पर होते हैं, न कि मुख्य सड़क पर। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस साल एक ही दिन में मुंबई में सालाना औसत पेड़ गिरने की घटनाओं का 50 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया।
BMC अब इस समस्या की गहराई से जांच करने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों और अरबोरिस्ट (पेड़ विशेषज्ञों) की मदद लेगी। एक वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा ताकि मानसून में पेड़ गिरने के असली कारणों का पता चल सके। इस स्टडी में यह भी देखा जाएगा कि सड़क किनारे लगे पेड़ों और जमीन के नीचे बिछी पाइपलाइन या अन्य बुनियादी ढांचे के बीच तालमेल कैसे बनाया जाए ताकि पेड़ सुरक्षित रहें।
पेड़ों की सुरक्षा के लिए BMC कुछ जरूरी कदम उठाने जा रही है। कमिश्नर ने बताया कि विशेषज्ञों से सलाह लेकर पेड़ की छंटाई (pruning) के लिए पुराने SOP को फिर से शुरू किया जाएगा और सभी सड़क किनारे के पेड़ों का निरीक्षण कर उनकी जरूरत के हिसाब से ट्रिमिंग की जाएगी। साथ ही, उन्होंने मानसून की तैयारी में मैनहोल की निगरानी जैसी छोटी कमियों को भी स्वीकार किया।
दूसरी तरफ, पर्यावरण विशेषज्ञों और अरबोरिस्ट वैभव राजे का मानना है कि सीमेंट और पेड़ एक साथ नहीं रह सकते। उनका कहना है कि जड़ों के आसपास कंक्रीट होने से पेड़ कमजोर हो जाते हैं और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इससे पहले 30 जून को चेंबूर में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 साल के बच्चे की मौत हो गई थी, जिसके बाद BMC ने जड़ों के आसपास से कंक्रीट हटाने के आदेश दिए थे।
जानकारी के मुताबिक, 5 से 6 जुलाई के बीच 24 घंटे में 523 पेड़ गिरे, जिसे BMC अधिकारियों ने 72-79 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं का नतीजा बताया। वहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2013 के नियमों के अनुसार हर पेड़ के आधार के चारों ओर एक मीटर का बफर जोन होना चाहिए, लेकिन शहर में अक्सर इन नियमों का उल्लंघन देखा गया है।