Mumbai में पानी की किल्लत, BMC चीफ ने दिए वाटर प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने के आदेश

Maharashtra: मुंबई में पानी की भारी कमी के बीच BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने शहर के बड़े वाटर सप्लाई और ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला तब आया है जब शहर के जलाशयों में पानी का स्त

Maharashtra: मुंबई में पानी की भारी कमी के बीच BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने शहर के बड़े वाटर सप्लाई और ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला तब आया है जब शहर के जलाशयों में पानी का स्तर 10 प्रतिशत से थोड़ा ही ऊपर रह गया है और लोगों को पानी की कटौती का सामना करना पड़ रहा है। कमिश्नर ने साफ किया कि शहर की भविष्य की जरूरतों और पानी की सुरक्षा के लिए इन प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना बहुत जरूरी है।

पानी की कमी को देखते हुए BMC ने कड़े नियम लागू किए हैं। अब निर्माण कार्यों के लिए पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं और नए कनेक्शन भी नहीं दिए जाएंगे। स्विमिंग पूल में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है, जबकि औद्योगिक और कमर्शियल संस्थानों की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। घरों के लिए 10 प्रतिशत की कटौती पहले से ही लागू है। इसके अलावा रेलवे, नेवी और MIDC जैसे बड़े संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कामों के लिए ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल करें।

कमिश्नर अश्विनी भिडे ने भांडुप कॉम्प्लेक्स में नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया और अधिकारियों से इसे तय समय सीमा में पूरा करने को कहा है। यह नया प्लांट प्रतिदिन 2,000 मिलियन लीटर पानी साफ करेगा और 46 साल पुराने प्लांट की जगह लेगा। BMC ने इसे जुलाई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस प्रोजेक्ट को Veolia और Welspun मिलकर पूरा कर रहे हैं।

इसके साथ ही भांडुप में 215 MLD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) भी अपने आखिरी चरण में है, जिसके अक्टूबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। यह प्लांट गंदे पानी को साफ कर उसे औद्योगिक उपयोग और बागवानी के लायक बनाएगा, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी।

परिवहन की बात करें तो गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) का काम भी तेजी से चल रहा है। संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे सुरंग बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) की तैयारी पूरी हो चुकी है और खुदाई का काम शुरू होने वाला है। यह 12.2 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट करीब 14,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है, जिससे मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इस पूरी कॉरिडोर को दिसंबर 2028 या 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है।