Maharashtra: मुंबई के सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को जगह देने के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। BMC की इम्प्रूवमेंट कमेटी की बैठक में BJP और Shiv Sena (UBT) के बीच आरोप-प्रत्य
Maharashtra: मुंबई के सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को जगह देने के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। BMC की इम्प्रूवमेंट कमेटी की बैठक में BJP और Shiv Sena (UBT) के बीच आरोप-प्रत्यारोप चले। मामला इस बात का है कि क्या सरकारी अस्पतालों की जमीन निजी ब्लड बैंकों को दी जानी चाहिए और इससे आम मरीजों की जेब पर क्या असर पड़ेगा।
प्राइवेट ब्लड बैंक के प्रस्ताव पर क्या है विवाद?
BMC प्रशासन ने कांदिवली के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल, घाटकोपर के राजावाड़ी, कुर्ला और बांद्रा के भाभा अस्पताल और बोरीवली के भगवती अस्पताल में PPP मॉडल के तहत ब्लड बैंक चलाने का प्रस्ताव रखा था। Shiv Sena (UBT) और कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि इससे ब्लड बैग की कीमत 1,100 रुपये से बढ़कर 1,600 से 2,000 रुपये तक जा सकती है, जिससे गरीब मरीजों को खून मिलना मुश्किल हो जाएगा।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सरकार का हस्तक्षेप
मुंबई BJP चीफ अमित सतम ने दावा किया कि 2003 से 2022 के बीच ही पांच निजी ब्लड बैंकों को जगह दी गई थी। वहीं Shiv Sena (UBT) के नेताओं ने पलटवार करते हुए पूछा कि तब कमेटी का अध्यक्ष कौन था। इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने दखल दिया, जिसके बाद BMC ने ब्लड बैंक और सेवन हिल्स अस्पताल से जुड़े विवादित प्रस्तावों को दोबारा विचार के लिए वापस भेज दिया है।
आम जनता और मरीजों पर क्या होगा असर?
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। नियम के मुताबिक एक ब्लड बैंक को करीब 150 वर्ग मीटर जगह चाहिए, लेकिन BMC ने कई अस्पतालों में इससे कहीं ज्यादा जगह प्राइवेट ठेकेदारों को देने का प्रस्ताव रखा था। इसके अलावा, थैलेसीमिया और हीमोफिलिया जैसे गंभीर रोगों के मरीजों को सरकारी नियमों के तहत मुफ्त खून मिलना चाहिए, लेकिन नए टेंडर में सिर्फ ‘रियायती दरों’ की बात कही गई है, जिससे मरीजों के शोषण का डर है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
किन अस्पतालों में प्राइवेट ब्लड बैंक चलाने का प्रस्ताव था?
यह प्रस्ताव कांदिवली के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल, घाटकोपर के राजावाड़ी, कुर्ला और बांद्रा के भाभा अस्पताल और बोरीवली के भगवती अस्पताल के लिए लाया गया था।
ब्लड बैंक के निजीकरण से कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?
Shiv Sena (UBT) के अनुसार, निजीकरण के बाद ब्लड बैग की कीमत 1,100 रुपये से बढ़कर 1,600 से 2,000 रुपये तक हो सकती है।