Mumbai में ब्लड स्टॉक की भारी कमी, अस्पतालों में खून के लिए भटक रहे परिवार; कई ब्लड बैंक बंद

Maharashtra: मुंबई के सरकारी अस्पतालों में खून की भारी किल्लत हो गई है, जिससे मरीजों के परिजनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शहर में हर दिन करीब 1,100 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है, लेकिन सप्लाई काफी कम हो गई है। हालत यह है कि

Maharashtra: मुंबई के सरकारी अस्पतालों में खून की भारी किल्लत हो गई है, जिससे मरीजों के परिजनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शहर में हर दिन करीब 1,100 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है, लेकिन सप्लाई काफी कम हो गई है। हालत यह है कि लोग अपने रिश्तेदारों के इलाज के लिए कई ब्लड बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

हाल ही में महाराष्ट्र FDA ने नियमों की अनदेखी और खून की हेराफेरी के चलते Sir JJ Mahanagar Blood Bank और Maya Blood Centre को बंद कर दिया है। इस वजह से शहर की सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा, भीषण गर्मी की वजह से कई ब्लड डोनेशन कैंप समय से पहले रद्द कर दिए गए या आगे बढ़ा दिए गए, जिससे स्टॉक में गिरावट आई। BMC के अस्पतालों जैसे KEM, Sion और Bhabha में ब्लड कलेक्शन में 36% से 43% तक की कमी देखी गई है।

थैलेसीमिया के मरीजों की स्थिति और भी खराब है, क्योंकि उनके लिए मिलने वाली सप्लाई में 23% की कमी आई है। नियम के मुताबिक इन मरीजों को मुफ्त खून मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान संकट के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है। वहीं, कुछ लोग रक्तदान करने तो पहुंचे, लेकिन टैटू बनवाने की वजह से उन्हें मना कर दिया गया। NBTC और WHO के नियमों के अनुसार, टैटू या बॉडी पियर्सिंग करवाने वालों को संक्रमण के खतरे के कारण 6 से 12 महीने तक रक्तदान करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Prakash Abitkar ने विधानसभा में बताया कि जनवरी से मई 2026 के बीच मुंबई और नाशिक में उपलब्ध 25,334 यूनिट्स में से 24,446 यूनिट्स का इस्तेमाल हो चुका है, जिससे रिजर्व बहुत कम बचा है। SBTC के डायरेक्टर डॉ. सुहास मोहनालकर ने कहा है कि कई ब्लड बैंक खुद के डोनेशन कैंप नहीं चला रहे हैं, जिसके कारण यह समस्या बढ़ी है। उन्होंने अब राज्य के सभी 450 ब्लड बैंकों की जांच के आदेश दिए हैं।

सरकार ने e-RaktKosh और Samanvay पोर्टल पर रियल टाइम स्टॉक अपडेट करना अनिवार्य किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि जो ब्लड बैंक स्टॉक की जानकारी अपडेट नहीं करेंगे, उन पर 1,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाएगा। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने साफ किया है कि ब्लड सेफ्टी नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।