Mumbai के Bhatia Hospital को देना होगा जुर्माना, इंश्योरेंस विवाद में नवजात बच्चे को मां से दूर रखा

Maharashtra : मुंबई के Bhatia Hospital को एक गंभीर लापरवाही के लिए करीब 37,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश मिला है। महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पाया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने कैशलेस इंश्योरेंस रि

Maharashtra : मुंबई के Bhatia Hospital को एक गंभीर लापरवाही के लिए करीब 37,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश मिला है। महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पाया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने कैशलेस इंश्योरेंस रिजेक्ट होने के बाद एक 2 दिन के नवजात बच्चे को उसकी मां से 9 घंटे से ज्यादा समय तक दूर रखा। यह घटना तब हुई जब बच्चे के पिता ने बिल की कुल राशि से ज्यादा पैसा पहले ही जमा कर दिया था।

यह पूरा मामला फरवरी 2017 का है, जिसकी शिकायत वकील राजेश धरप ने की थी। उनके जुड़वां बेटों में से एक को हाइपोग्लाइसीमिया की वजह से NICU में भर्ती किया गया था। जब कैशलेस इंश्योरेंस अप्रूवल में देरी हुई और बाद में इसे रिजेक्ट कर दिया गया, तो अस्पताल ने बच्चे की छुट्टी रोकने की कोशिश की। आयोग ने अस्पताल के इस व्यवहार को बेहद संवेदनहीन और लापरवाह बताया।

कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस एस.पी. तवाड़े और सदस्य विजय सी. प्रेमचंदानी ने स्पष्ट किया कि कोई भी अस्पताल केवल इंश्योरेंस की कागजी कार्रवाई या बिल के भुगतान के नाम पर मरीज को बंधक नहीं बना सकता। कोर्ट ने कहा कि जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले को बहुत तकनीकी नजरिए से देखा और बच्चे की उम्र और उसकी मां की घबराहट जैसे मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज किया।

आयोग ने अस्पताल को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया है:

  • मानसिक प्रताड़ना के लिए 25,000 रुपये का मुआवजा।
  • मुकदमे के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये।
  • ज्यादा वसूले गए 2,000 रुपये का रिफंड 6% ब्याज के साथ।

इस मामले में कुल जुर्माना ब्याज मिलाकर लगभग 38,080 रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि यह घटना 2017 की थी, लेकिन आयोग का यह फैसला 21 जुलाई 2026 को आया, जो अब अन्य अस्पतालों के लिए एक सबक की तरह है कि वे मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार न करें।