Mumbai में BEST बसों का बदलता दौर, पुरानी यादों और नए विवादों के बीच फंसी शहर की लाइफलाइन

Maharashtra: मुंबई की पहचान मानी जाने वाली लाल रंग की BEST बसों को लेकर इन दिनों पुरानी यादें और मौजूदा समस्याएं चर्चा में हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे पहले बसों के लिए कतारें लगती थीं, जो अब

Maharashtra: मुंबई की पहचान मानी जाने वाली लाल रंग की BEST बसों को लेकर इन दिनों पुरानी यादें और मौजूदा समस्याएं चर्चा में हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे पहले बसों के लिए कतारें लगती थीं, जो अब एक सपना जैसा लगता है। वहीं दूसरी ओर, बस डिपो के निजीकरण और बसों की खराब हालत को लेकर शहर में विवाद बढ़ रहा है।

पुरानी यादों की बात करें तो 1976 की फिल्म ‘छोटी सी बात’ में दिखाया गया था कि कैसे लोग सलीके से लाइन लगाकर बस का इंतजार करते थे। शहर के इतिहासकार दीपक राव बताते हैं कि रूट नंबर 123 कभी शहर की खूबसूरती दिखाने वाला सबसे बेहतरीन रास्ता हुआ करता था। 67 साल के निवासी अस्पी देबू ने बताया कि 70 के दशक में डबल डेकर बस की ऊपरी मंजिल पर सफर करना एक अलग ही खुशी देता था, जो अब के एयर कंडीशनर वाली इलेक्ट्रिक बसों में नहीं दिखता।

वर्तमान स्थिति की बात करें तो BEST के सामने कई चुनौतियां हैं। 12 जुलाई 2026 को ‘आमची मुंबई आमची बेस्ट’ (AMAB) नाम के समूह ने सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया जिसमें बस डिपो को लंबी लीज पर निजी कंपनियों को देने की बात कही गई थी। हालांकि, BEST अधिकारियों ने निजीकरण से इनकार करते हुए कहा कि इससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल नई बसें खरीदने और सुविधाओं को सुधारने में किया जाएगा।

सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 10 जुलाई 2026 को एक बस के ब्रेक फेल होने के बाद 13 जुलाई को BEST कमेटी के सदस्यों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि वेट-लीज बसों में तकनीकी खराबी की चेतावनी पहले ही दी गई थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।

सरकार ने इन समस्याओं को सुलझाने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। जून 2026 में कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की कि अगले तीन साल में 5,000 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएंगी। साथ ही कर्मचारियों के वेतन में भी बढ़ोतरी की जाएगी ताकि ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और मजबूत बनाया जा सके।