Maharashtra: मुंबई के बांद्रा स्टेशन (East) के पास स्थित गरीब नगर की झुग्गियों को हटा दिया गया है। Western Railway ने यहां करीब 500 अवैध ढांचों को गिराकर जमीन खाली करा ली है। इस जगह का इस्तेमाल मुंबई के एक बड़े रेल प्रोज
Maharashtra: मुंबई के बांद्रा स्टेशन (East) के पास स्थित गरीब नगर की झुग्गियों को हटा दिया गया है। Western Railway ने यहां करीब 500 अवैध ढांचों को गिराकर जमीन खाली करा ली है। इस जगह का इस्तेमाल मुंबई के एक बड़े रेल प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को काफी सुविधा होगी।
इस प्रोजेक्ट से आम जनता को क्या फायदा होगा?
इस जमीन पर एक ‘इंटीग्रेटेड रेलवे प्रोजेक्ट’ तैयार किया जाएगा। इसका मुख्य मकसद लोकल ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ को कम करना और यात्रियों के आने-जाने के रास्ते को आसान बनाना है। इससे BKC में बन रहे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशन तक पहुंचना आसान होगा और मुंबई से 50 नई ट्रेनें चलाने की योजना है।
काम की प्रगति और अब तक क्या हुआ?
रेलवे ने बताया कि 23 मई 2026 तक तोड़फोड़ का काम पूरा हो चुका है। जमीन को समतल करने और सुरक्षा घेरा बनाने का काम चल रहा है। प्रोजेक्ट की मुख्य बातें नीचे दी गई टेबल में देखें:
| विवरण |
जानकारी |
| कुल हटाए गए ढांचे |
500 अवैध घर |
| कुल क्षेत्रफल |
लगभग 5,200 वर्ग मीटर |
| मुख्य उद्देश्य |
5वीं और 6वीं रेलवे लाइन का विस्तार |
| बुलेट ट्रेन स्टेशन पूरा होने की तारीख |
मार्च 2028 |
| मलबे की सफाई |
35% से 60% तक पूरी |
कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास की क्या व्यवस्था है?
यह पूरी कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद की गई है। Western Railway के CPRO विनीत अभिषेक ने पुष्टि की है कि तय योजना के मुताबिक काम पूरा हो गया है। जिन परिवारों को 2021 के सर्वे में पात्र पाया गया था, उन्हें MMRDA और रेलवे मिलकर घर देंगे। इसके लिए आवास का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पूर्व सांसद किरीट सोमैया के अनुसार, अगले छह महीनों में यहां बड़ा बदलाव दिखेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बांद्रा स्टेशन के पास झुग्गियां क्यों हटाई गईं?
यह जमीन मुंबई के एक एकीकृत रेलवे प्रोजेक्ट के लिए चाहिए थी, जिसमें 5वीं और 6वीं रेलवे लाइन का विस्तार और यात्री सुविधाओं को बढ़ाना शामिल है।
क्या हटाए गए लोगों को घर मिलेगा?
हां, 2021 के सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों के पुनर्वास का खर्च Western Railway और MMRDA मिलकर उठाएंगे।