Mumbai के Bandra में बनेगा अनोखा Sea-Viewing Deck, सीवेज प्लांट के ऊपर टहल सकेंगे लोग

Maharashtra/Mumbai: मुंबई के उपनगरों में पहली बार एक ऐसा Sea-Viewing Deck बनाया जा रहा है जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के ठीक ऊपर स्थित होगा। यह प्रोजेक्ट बांद्रा में बांद्रा-वर्ली सी लिंक के पास बन रहा है, जहां लोग स

Maharashtra/Mumbai: मुंबई के उपनगरों में पहली बार एक ऐसा Sea-Viewing Deck बनाया जा रहा है जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के ठीक ऊपर स्थित होगा। यह प्रोजेक्ट बांद्रा में बांद्रा-वर्ली सी लिंक के पास बन रहा है, जहां लोग समुद्र का नजारा ले सकेंगे। इस पूरे कॉम्प्लेक्स में गार्डन, स्काईवॉक और एक सिविक नॉलेज सेंटर भी शामिल होगा।

यह पूरा प्रोजेक्ट BMC के 30,000 करोड़ रुपये के वेस्टवाटर ट्रीटमेंट फैसिलिटी (WWTF) प्रोजेक्ट का हिस्सा है। बांद्रा का यह प्लांट उन सात प्लांटों में से एक है जिन्हें 2026 के अंत और 2027 के बीच चालू किया जाना है। इस व्यूइंग डेक और नॉलेज सेंटर को बनाने में करीब 67 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

अतिरिक्त नगर आयुक्त (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बांगर ने बताया कि बांद्रा-वर्ली सी लिंक की ऊंचाई की पाबंदियों की वजह से इसे मल्टी-लेवल डिजाइन किया गया है। उन्होंने भरोसा दिया कि यह फैसिलिटी पूरी तरह से गंध-मुक्त (odour-free) होगी, ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो। इस प्रोजेक्ट के जरिए करीब 2.6 एकड़ का खुला हरा-भरा इलाका जनता के लिए उपलब्ध होगा।

इस सुविधा में केवल नजारे ही नहीं, बल्कि पढ़ाई-लिखाई के लिए भी इंतजाम होंगे। ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर एक सिविक नॉलेज सेंटर होगा, जिसमें डिजिटल क्लासरूम, मॉडर्न लाइब्रेरी, ऑडिटोरियम और डिजिटल स्टडी डेस्क जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

डिप्टी चीफ इंजीनियर राजेंद्र परब के मुताबिक, इस प्लांट के शुरू होने से माहिम, बांद्रा, बीकेसी, खेरवाड़ी और सांताक्रूज जैसे इलाकों के समुद्री पानी की क्वालिटी सुधरेगी और समुद्री जीवों को फायदा होगा। यह प्रोजेक्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा बिना ट्रीटमेंट के सीवेज पानी छोड़ने पर लगाए गए जुर्माने के बाद शुरू किया गया था।

मुख्य जानकारी विवरण
तैयार होने की तारीख जुलाई 2027
कुल लागत (डेक और सेंटर) 67 करोड़ रुपये
तकनीक Membrane Bio-Reactor (MBR)
कुल खुला क्षेत्र 2.6 एकड़
प्रभावित पेड़ 265 (दूसरे स्थानों पर लगाए गए)
कुल क्षमता (7 प्लांट मिलाकर) 2,400 मिलियन लीटर प्रतिदिन