Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने 58.1 करोड़ रुपये के बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड केस में औरंगाबाद के कारोबारी Chisti Ahteshamuddin को जमानत दे दी है। यह मामला एक बुजुर्ग व्यक्ति से धोखाधड़ी से जुड़े होने के क
Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने 58.1 करोड़ रुपये के बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड केस में औरंगाबाद के कारोबारी Chisti Ahteshamuddin को जमानत दे दी है। यह मामला एक बुजुर्ग व्यक्ति से धोखाधड़ी से जुड़े होने के कारण काफी चर्चा में रहा था। कोर्ट ने कारोबारी की दलीलों को सुनते हुए यह फैसला सुनाया है।
जमानत मिलने की मुख्य वजह क्या रही
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश Nitin V. Jiwane ने जमानत देते हुए कहा कि इस केस की सुनवाई में काफी समय लग सकता है, इसलिए आरोपी को अनिश्चित समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। कारोबारी के वकील Mobin Solkar ने तर्क दिया कि उनके बैंक खाते में आया पैसा फरार आरोपी Riyaz Rabbani के साथ किए गए कानूनी बिजनेस का हिस्सा था। कोर्ट ने माना कि इस स्टेज पर यह नहीं कहा जा सकता कि पैसा बिजनेस लेनदेन का नहीं था।
क्या है यह पूरा ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामला
इस घोटाले में जालसाजों ने एक 72 साल के बुजुर्ग कारोबारी को निशाना बनाया था। ठगों ने खुद को TRAI, CBI और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया और वीडियो कॉल के जरिए उन्हें मानसिक दबाव में रखकर पैसे ट्रांसफर करवाए। इस पूरे खेल में पैसों की हेराफेरी के लिए 13 लेयर्स और 6,500 से ज्यादा फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए सरकारी नियम और चेतावनी
भारत के कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि गिरफ्तारी या हिरासत का कोई भी नोटिस WhatsApp, SMS या ईमेल के जरिए नहीं भेजा जा सकता। साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट के लिए सरकार ने कुछ जरूरी कदम उठाए हैं:
| सुविधा/संस्था |
विवरण |
| हेल्पलाइन नंबर |
1930 (तुरंत रिपोर्ट के लिए) |
| सरकारी सेंटर |
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) |
| रिपोर्टिंग सिस्टम |
Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System |