Maharashtra : मुंबई की मशहूर Asiatic Society के चुनाव को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्यसभा सांसद Vinay Sahasrabuddhe ने इसे सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि ‘वैचारिक छुआछूत’ के खिलाफ लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि
Maharashtra : मुंबई की मशहूर Asiatic Society के चुनाव को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्यसभा सांसद Vinay Sahasrabuddhe ने इसे सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि ‘वैचारिक छुआछूत’ के खिलाफ लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि 200 साल पुराने इस संस्थान की गरिमा को वापस लाना जरूरी है ताकि यहाँ केवल पढ़ाई और रिसर्च पर ध्यान दिया जा सके।
Asiatic Society चुनाव में मुख्य विवाद क्या है?
इस संस्थान के मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव को लेकर काफी विवाद चल रहा है। Vinay Sahasrabuddhe ‘Asiatic Tomorrow’ पैनल के नेतृत्व में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने पूर्व कांग्रेस सांसद Kumar Ketkar खड़े हैं। सहस्रबुद्धे का आरोप है कि संस्थान में वैचारिक भेदभाव किया जाता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि ‘हिंदुत्व’ पर आधारित एक फेलोशिप आवेदन को खारिज कर दिया गया, जो कि गलत है।
चुनाव रुकने और कोर्ट के हस्तक्षेप की क्या वजह है?
चैरिटी कमिश्नर Amogh Kaloti ने 13 मार्च 2026 को चुनाव टालने का आदेश दिया था। इस आदेश के पीछे कुछ गंभीर कारण बताए गए हैं:
- अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच मंजूर किए गए 1,467 मेंबरशिप आवेदनों की वैधता पर सवाल थे।
- संस्थान से कुछ दुर्लभ किताबों के गायब होने की खबरें सामने आई थीं।
- मैनेजमेंट कमेटी के कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
अब आगे क्या होगा और कोर्ट का क्या फैसला है?
चुनाव टालने और वोटर लिस्ट को दोबारा तैयार करने के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। 18 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली है और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब कोर्ट के फैसले से यह साफ होगा कि चुनाव कब होंगे और किन लोगों को वोट देने का अधिकार मिलेगा।