Mumbai की Arthur Road Jail में क्षमता से 3 गुना ज्यादा कैदी, बरामदों में सोने को मजबूर लोग

Maharashtra: मुंबई की मशहूर Arthur Road Jail ने अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। यह जेल शहर के सबसे खतरनाक अपराधियों से लेकर बड़े सफेदपोश आरोपियों तक का ठिकाना रही है। लेकिन आज यह जेल अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा कैदियों के ब

Maharashtra: मुंबई की मशहूर Arthur Road Jail ने अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। यह जेल शहर के सबसे खतरनाक अपराधियों से लेकर बड़े सफेदपोश आरोपियों तक का ठिकाना रही है। लेकिन आज यह जेल अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा कैदियों के बोझ तले दबी हुई है, जिससे यहां हालात काफी खराब हो गए हैं।

सरकारी आंकड़ों की मानें तो Arthur Road Jail की क्षमता सिर्फ 999 कैदियों की है, लेकिन फरवरी 2026 तक यहां 3,663 कैदी रह रहे थे। इसका मतलब है कि जेल अपनी क्षमता से 366% ज्यादा भरी हुई है। हालात इतने गंभीर हैं कि जो बैरक 25 से 50 लोगों के लिए बने थे, वहां अब 150 से 300 लोग रह रहे हैं। जगह की कमी की वजह से कैदियों को बरामदों में सोना पड़ रहा है। जेल अधीक्षक Harshad Ahirrao ने बताया कि ज्यादा कैदियों को रखने के लिए अब गलियारों और बरामदों को भी तोड़ना पड़ा है।

जेल का यह हाल मुंबई के बदलते अपराधों की कहानी भी कहता है। 1960 के दशक में यहां बड़े स्मगलर रहते थे, 90 के दशक में गैंगवार चलाने वाले अपराधी आए और अब यहां बड़े कॉरपोरेट और सफेदपोश अपराधी नजर आते हैं। जेल प्रशासन ने सुविधाओं में सुधार किया है, जैसे दिन में तीन बार पका हुआ खाना, 10 हजार रुपये महीने तक की कैंटीन सुविधा और महीने में दो बार वीडियो कॉल की सुविधा दी गई है। साथ ही केस ट्रैक करने के लिए फिंगरप्रिंट कियोस्क भी लगाए गए हैं।

महाराष्ट्र की जेलों की स्थिति पर नजर डालें तो राज्य की कुल 60 जेलों में ऑक्युपेंसी रेट 155% है, जिससे महाराष्ट्र देश में तीसरे नंबर पर है। Prison Statistics of India 2024 के मुताबिक, राज्य की जेलों में 80% से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनका अभी ट्रायल चल रहा है यानी वे अभी दोषी साबित नहीं हुए हैं।

विवरण आंकड़े/जानकारी
Arthur Road Jail क्षमता 999 कैदी
वर्तमान कैदी (फरवरी 2026) 3,663 कैदी
ऑक्युपेंसी रेट 366%
महाराष्ट्र जेल ऑक्युपेंसी 155% (देश में तीसरा स्थान)
अंडरट्रायल कैदियों की संख्या 80% से अधिक
न्यूनतम जगह का नियम 3.71 वर्ग मीटर प्रति कैदी

इस समस्या को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र गृह विभाग नई जेलों और अतिरिक्त बैरक बनाने की योजना पर काम कर रहा है ताकि राज्य की कुल क्षमता को बढ़ाकर 44,294 किया जा सके। वहीं, नए कानून Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) के जरिए समय पर ट्रायल पूरा करने और सामुदायिक सेवा जैसे विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है ताकि जेलों का बोझ कम हो सके।