Mumbai-Ahmedabad Bullet Train में पहली बार लगी Tunnel Hood टेक्नोलॉजी, शोर कम होगा और बढ़ेगा यात्रियों का आराम
Maharashtra/Gujarat: मुंबई और अहमदाबाद के बीच बनने वाली बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट में अब एक नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। भारत में पहली बार रेलवे टनल में ‘टनल हुड’ (Tunnel Hood) टेक्नोलॉजी लगाई ग
Maharashtra/Gujarat: मुंबई और अहमदाबाद के बीच बनने वाली बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट में अब एक नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। भारत में पहली बार रेलवे टनल में ‘टनल हुड’ (Tunnel Hood) टेक्नोलॉजी लगाई गई है। नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के मुताबिक, इस सिस्टम से ट्रेन की रफ्तार बढ़ने पर होने वाले शोर और हवा के दबाव को कंट्रोल किया जा सकेगा, जिससे यात्रियों का सफर और ज्यादा आरामदायक होगा।
यह तकनीक खास तौर पर उन ट्रेनों के लिए है जो 300 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलती हैं। जब इतनी तेज रफ्तार वाली ट्रेन टनल में घुसती या बाहर निकलती है, तो हवा के दबाव की वजह से एक जोरदार धमाके जैसी आवाज आती है, जिसे ‘टनल बूम’ कहा जाता है। टनल हुड कंक्रीट के बने फनल जैसे ढांचे होते हैं, जो टनल के मुहाने पर लगाए जाते हैं। ये ढांचे हवा के दबाव को धीरे-धीरे बाहर निकलने देते हैं, जिससे शोर कम होता है और आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी नहीं होती।
इस प्रोजेक्ट में जापानी शिंकानसेन (Shinkansen) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है और इसे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) द्वारा फंड किया गया है। टनल हुड का काम महाराष्ट्र के पालघर और गुजरात के वलसाड जिले में चल रहा है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल टनल हुड्स | महाराष्ट्र में 7 और गुजरात में 1 |
| लोकेशन | पालघर (महाराष्ट्र) और जरोली गांव (वलसाड, गुजरात) |
| हुड की लंबाई | 30 से 45 मीटर तक |
| प्रेशर रिलीफ विंडो | हर हुड में 20 से 26 खिड़कियां |
| सबसे बड़ा इंस्टालेशन | पालघर की MT-3 और MT-4 टनल (45 मीटर हुड, 26 खिड़कियां) |
| वलसाड इंस्टालेशन | MT-8 टनल (31 मीटर हुड, 20 खिड़कियां) |