Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: 2027 से शुरू होगा पहला सेक्शन, 8 घंटे का सफर अब सिर्फ 2 घंटे में होगा पूरा

Gujarat/Maharashtra: भारत की पहली हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट से मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी, जिससे व्यापार, रोजगार और यात्रा के तरीके में बड़ा बदला

Gujarat/Maharashtra: भारत की पहली हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट से मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी, जिससे व्यापार, रोजगार और यात्रा के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस प्रोजेक्ट की समयसीमा को लेकर जरूरी जानकारी साझा की है।

इस प्रोजेक्ट के जरिए मुंबई और अहमदाबाद के बीच का सफर, जो अभी सड़क या ट्रेन से 8-9 घंटे लेता है, अब घटकर लगभग 2 घंटे रह जाएगा। हवाई जहाज से भी एयरपोर्ट की प्रक्रियाओं को मिलाकर 4-5 घंटे लगते हैं, उसकी तुलना में यह काफी तेज होगा। प्रोजेक्ट का पहला हिस्सा सूरत और बिलीमोरा के बीच 15 अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद 2028 तक यह ठाणे और 2029 तक मुंबई पहुंचेगी। पूरा 508 किलोमीटर का कॉरिडोर दिसंबर 2029 तक तैयार हो जाएगा।

रेलवे बोर्ड के अधिकारी धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि इस ट्रेन से सूरत जैसे शहरों में बिजनेस ट्रैवल बढ़ेगा और रियल एस्टेट में भी तेजी आएगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और कुशल कामगारों के लिए नए मौके खुलेंगे। प्रोजेक्ट में जापान की शिंकानसेन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) ने इसकी लागत का 81 प्रतिशत हिस्सा लोन के रूप में दिया है।

मुख्य विवरण जानकारी
कुल लंबाई 508 किलोमीटर
पहला सेक्शन (सूरत-बिलीमोरा) 15 अगस्त 2027
मुंबई तक पहुंच 2029
अनुमानित लागत लगभग 2 लाख करोड़ रुपये
तकनीक जापानी शिंकानसेन (Shinkansen)
कुल भौतिक प्रगति (जनवरी 2026) 57% से अधिक

इस बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कई बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं। L&T, Afcons Infrastructure, IRCON International और HCC जैसी कंपनियां अलग-अलग हिस्सों का निर्माण कर रही हैं। मुंबई के BKC में अंडरग्राउंड स्टेशन और ठाणे क्रीक के पास 7 किलोमीटर लंबी भारत की पहली undersea रेल टनल का काम भी शुरू हो चुका है।

आर्थिक नजरिए से देखें तो इस प्रोजेक्ट से करीब 4,000 सीधी और 35,000 से 40,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। निर्माण कार्य के दौरान लगभग 40,000 मजदूर लगे हुए हैं। सूरत और वापी जैसे स्टेशनों के आसपास नए कमर्शियल जोन, होटल और ऑफिस स्पेस विकसित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।