Maharashtra, Gujarat: मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के काम में अब तेजी आ गई है। इस प्रोजेक्ट में पहली बार जापान की तकनीक वाला ‘बैलेस्टलेस ट्रैक सिस्टम’ इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ट्रेनें
Maharashtra, Gujarat: मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के काम में अब तेजी आ गई है। इस प्रोजेक्ट में पहली बार जापान की तकनीक वाला ‘बैलेस्टलेस ट्रैक सिस्टम’ इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ट्रेनें बहुत तेज रफ्तार से और सुरक्षित तरीके से चल सकेंगी। NHSRCL के मुताबिक, इस आधुनिक सिस्टम की मदद से ट्रेनें 320 kmph की स्पीड तक पहुंच सकेंगी।
ट्रैक का काम कहां तक पहुंचा है?
NHSRCL ने 22 अप्रैल 2026 को बताया कि ट्रैक बिछाने का काम लगातार चल रहा है। अब तक की प्रोग्रेस इस प्रकार है:
| काम का विवरण |
पूरी हुई मात्रा |
| RC ट्रैक बेड बिछाया गया |
185 रूट किमी |
| ट्रैक स्लैब का निर्माण |
188 रूट किमी |
| स्लैब बिछाना और CAM इंजेक्शन |
70 रूट किमी |
जापानी तकनीक और भारतीय मशीनें
इस प्रोजेक्ट में जापान की Shinkansen तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। J-Slab सिस्टम में RC ट्रैक बेड, सीमेंट डामर मोर्टार (CAM), प्री-कास्ट ट्रैक स्लैब और रेल फास्टनर्स का इस्तेमाल होता है। खास बात यह है कि इस काम के लिए इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर मशीनें भारत में ही बनाई गई हैं। भारतीय कर्मचारियों को रेल वेल्डिंग और निरीक्षण की ट्रेनिंग जापानी कंपनी JARTS ने दी है।
कौन सी कंपनियां कर रही हैं काम?
इस बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई बड़ी कंपनियां जुड़ी हुई हैं। L&T मुंबई से जरोली (156 किमी) और वडोदरा से साबरमती डिपो (116 किमी) के बीच ट्रैक बिछाने का काम देख रही है। वहीं, IRCON इंटरनेशनल को वडोदरा और वापी के बीच 237 किमी के ट्रैक का काम मिला है। ट्रैक स्लैब बनाने के लिए गुजरात के किम (सूरत के पास) और आणंद में दो बड़ी फैक्ट्रियां लगाई गई हैं।