Mumbai 7/11 ब्लास्ट के 20 साल पूरे, असली गुनहगार अब भी फरार; जांच पर उठे सवाल

Maharashtra: मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 जुलाई 2006 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को आज 20 साल पूरे हो गए हैं। इस खौफनाक हमले में 189 लोगों की जान गई थी और 800 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी

Maharashtra: मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 जुलाई 2006 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को आज 20 साल पूरे हो गए हैं। इस खौफनाक हमले में 189 लोगों की जान गई थी और 800 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी यह सवाल बरकरार है कि इन धमाकों के पीछे असली हाथ किसका था, क्योंकि जांच अब फिर से शुरुआती बिंदु यानी ‘स्क्वायर जीरो’ पर पहुंच गई है।

इस मामले में पिछले साल बॉम्बे High Court ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने महाराष्ट्र ATS की जांच पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। High Court ने यह भी जिक्र किया कि जांच के दौरान दबाव में काम किया गया और टॉर्चर जैसी बातें सामने आईं। कोर्ट के मुताबिक, गलत व्यक्ति को सजा देकर न्याय का दिखावा करना जनता के भरोसे को तोड़ता है और असली खतरा बना रहता है।

ATS ने इस फैसले को Supreme Court में चुनौती दी थी। 24 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने High Court के फैसले पर रोक लगाई, लेकिन यह रोक केवल उन टिप्पणियों पर थी जिन्हें अन्य केस में मिसाल न बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की बेगुनाही और उनकी रिहाई के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिससे उनकी रिहाई बरकरार रही।

जांच को लेकर उलझन इस बात की है कि शुरू में ATS ने SIMI और लश्कर-ए-तैयबा के गठजोड़ को जिम्मेदार बताया था। बाद में अन्य एजेंसियों की जांच में इंडियन मुजाहिदीन (IM) का नाम सामने आया। अब जब मुख्य आरोपी बरी हो चुके हैं, तो हमले से बचे लोगों का कहना है कि यह सरकार और जांच टीम की सामूहिक विफलता है। पीड़ितों ने मांग की है कि असली दोषियों को ढूंढकर उन्हें कड़ी सजा दी जाए।